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जानिए रितिक रोशन ने कैसे दूर की अपने हकलाने की प्रॉब्लम

आज रितिक रोशन की डायलॉग डिलीवरी के फैंस और फिल्ममेकर्स कायल हैं। लेकिन कभी ऐसा सोच पाना, कर पाना उनके लिए बहुत मुश्किल था। दरअसल, रितिक फिल्मों में आने से पहले हकलाते यानी अटक कर बोलते थे। जानिए कैसे दूर की रितिक ने अपनी प्रॉब्लम

जानिए रितिक रोशन ने  कैसे दूर की अपने हकलाने की प्रॉब्लम

आज रितिक रोशन की डायलॉग डिलीवरी के फैंस और फिल्ममेकर्स कायल हैं। लेकिन कभी ऐसा सोच पाना, कर पाना उनके लिए बहुत मुश्किल था। दरअसल, रितिक फिल्मों में आने से पहले हकलाते यानी अटक कर बोलते थे। ऐसे में उन्होंने स्पीच थेरेपी की मदद ली, अपनी प्रॉब्लम से उबरे और अपने एक्टर बनने के सपने को पूरा किया। इसी वजह से द इंडियन स्टैमरिंग एसोसिएशन का ब्रांड एंबेसडर बनने के लिए उनसे संपर्क किया गया।

इसी सिलसिले में एसोसिएशन के नौ सदस्यों ने रितिक के साथ उनके घर पर चर्चा की। यह मुलाकात बीस मिनट की होनी थी, लेकिन लगभग एक घंटे तक चली। रितिक ने इस मुलाकात में खुलासा किया कि वह कैसे शीशे के सामने खड़े होकर बात करने की प्रैक्टिस किया करते थे, अपनी आवाज रिकॉर्ड करते थे और गाना भी सीखते थे।

रितिक ने सदस्यों को बताया, ‘मैं हर दिन अच्छे से बोलने की प्रैक्टिस करता था और आज भी करता हूं। मैं अभी भी कम से कम एक घंटे के लिए बोलने की प्रैक्टिस करता हूं, जिससे मैं हकलाने की प्रॉब्लम को कंट्रोल करके रखूं। मुझे यह प्रॉब्लम 2012 तक बनी रही यानी जब तक कि मैं फिल्म स्टार नहीं बन गया। अपने करियर के शुरुआती सालों में, मुझे कई स्क्रिप्ट को ना कहना पड़ा, जिनमें लंबे मोनोलॉग थे, क्योंकि इन्हें बोलने को लेकर मैं श्योर नहीं था।

मुझे याद है कि एक अवार्ड लेने के लिए दुबई जाना था, उस समय मैं दुबई शब्द कहने के लिए संघर्ष कर रहा था। मैंने अवार्ड पाने के बाद स्पीच बोलने की बार-बार प्रैक्टिस की। मेरा मानना है कि खुद में कॉन्फिडेंस हो तो इस तरह की प्रॉब्लम से आसानी से उबरा जा सकता है।’

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