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Happy Republic Day 2019: ''देश की एकता-अखंडता के लिए प्रतिबद्ध थे मौलाना आजाद''

गणतंत्र दिवस 2019 (Republic Day 2019) आने को है। गणतंत्र दिवस 2019 (Republic Day 2019) की तैयारियां भी पूरे देश में हो रही है। भारत की तीनों सेनाएं गणतंत्र दिवस परेड 2019 (Republic Day Parade 2019) की रिहर्सल कर रही हैं। अगर आप दिल्ली में रह रहे हों तो इस समय आपको सुबह-शाम लाइन से हवाई जहाज उड़ते दिख जाएंगे। सेनाएं ही नहीं आम जनता भी गणतंत्र दिवस (Republic Day) को लेकर पूरी तैयारी में हैं। लोग गणतंत्र दिवस पर बधाई संदेश (Republic Day Wishes) भेजकर एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। आज के समय में लोग गणतंत्र दिवस की शायरी (Republic Day Shayari), गणतंत्र दिवस की कविता (Republic Day Poems), गणतंत्र दिवस के विचार (Republic Day Quotes), गणतंत्र दिवस के व्हाट्सएप स्टेटस (Republic Day Whatsapp Status) के साथ एक दूसरे को बाधाई देते हैं। आम लोगों के साथ ही बड़े पर्दे के कलाकार भी गणतंत्र दिवस को बड़े ही उत्साह के साथ मनाते हैं। आइए जानते हैं कि भारत के 70वें गणतंत्र दिवस (70th Republic Day) पर क्या कहते हैं आपके पसंदीदा कलाकार।

Happy Republic Day 2019: देश की एकता-अखंडता के लिए  प्रतिबद्ध थे मौलाना आजाद
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आज गणतंत्र दिवस 2019 (Republic Day 2019) है। लोग गणतंत्र दिवस पर बधाई संदेश (Republic Day Wishes) भेजकर एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। लोग गणतंत्र दिवस पर बधाई संदेश (Republic Day Wishes) भेजकर एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। आज के समय में लोग गणतंत्र दिवस की शायरी (Republic Day Shayari), गणतंत्र दिवस की कविता (Republic Day Poems), गणतंत्र दिवस के विचार (Republic Day Quotes), गणतंत्र दिवस के व्हाट्सएप स्टेटस (Republic Day Whatsapp Status) के साथ एक दूसरे को बाधाई देते हैं। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस हर देशवासी के लिए बहुत खास दिन है। हमारे फिल्म निर्माता इस खास दिन पर या इससे कुछ पहले देशप्रेम से जुड़ी फिल्में रिलीज करने की कोशिश में रहते हैं। इस बार भी गणतंत्र दिवस पर महान स्वतंत्रता सेनानी और देश के पहले शिक्षा मंत्री रहे मौलाना अबुल कलाम आजाद की बायोपिक रिलीज हुई है। मौलाना आजाद, महात्मा गांधी के सिद्धांतों के समर्थक थे। वह हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए हमेशा प्रयासरत रहे। इस बायोपिक को डॉ. राजेंद्र गुप्ता ‘संजय’ और संजय सिंह नेगी ने डायरेक्ट किया है। फिल्म ‘वो जो था एक मसीहा-मौलाना आजाद’ से जुड़ी बातें बता रहे हैं, फिल्म के लेखक-निर्देशक डॉ. राजेंद्र गुप्ता ‘संजय’ और को-डायरेक्टर संजय सिंह नेगी।
फिल्म का नाम ‘वो जो था एक मसीहा-मौलाना आजाद’ क्यों रखा?
डॉ. राजेंद्र गुप्ता ‘संजय’- कॉलेज के जमाने में मैंने मौलाना आजाद के बारे में काफी कुछ पढ़ा था। मेरे पिता जी उनसे काफी प्रभावित थे। जब मौलाना आजाद की मृत्यु हुई तो मेरे पिता जी बहुत डिस्टर्ब हो गए थे। तब मैंने उनके बारे में स्टडी करना शुरू किया। मैंने एक जगह पढ़ा कि किसी ने मौलाना आजाद से पूछा- ‘अगर आसमान से कोई फरिश्ता आकर कहे कि आपको स्वराज्य दे दिया जाएगा लेकिन आप हिंदू-मुस्लिम एकता के बारे में सोचना छोड़ दो।’ तो मौलाना आजाद का जवाब था- मैं हिंदू-मुस्लिम एकता के रास्ते को नहीं छोड़ूंगा, स्वराज्य आज नहीं तो कल मिलना ही है, मिल ही जाएगा लेकिन अगर एक बार हिंदू-मुस्लिम एकता टूट गई तो फिर वह जुड़ नहीं पाएगी। उनकी इस बात से पता चलता है कि वह देश की एकता, अखंडता के लिए कितने प्रतिबद्ध थे। ऐसे व्यक्ति का व्यक्तित्व, विचार और जीवन आमजन तक पहुंचना ही चाहिए। इसके बाद से ही मैंने मौलाना आजाद पर फिल्म बनाने की ठानी और इस तरह उन पर पहली फीचर फिल्म तैयार हुई। पहले मैं इस फिल्म का टाइटल ‘भारत रत्न मौलाना आजाद’ चाहता था लेकिन मुझे यह टाइटल मिला नहीं। बाद में मैंने सोचा कि चूंकि मौलाना किसी मसीहा से कम नहीं थे, इसलिए फिल्म का नाम ‘वो जो था एक मसीहा-मौलाना आजाद’ रखा।
संजय सिंह नेगी : मौलाना आजाद महान स्वतंत्रता सेनानी थे। वह हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए हमेशा प्रयास करते रहे, ऐसा केवल वही इंसान कर सकता है, जिसमें मसीहा के गुण हों। मौलाना आजाद हिंदुस्तान के बंटवारे के सख्त खिलाफ थे। हमें रिसर्च करने पर पता चला कि महज बारह साल की उम्र में उन्होंने हस्तलिखित पत्रिका निकाली। बाद में दो पत्रिकाओं का प्रकाशन किया, जिनकी लोकप्रियता से डरकर अंग्रेजी हुकूमत ने पत्रिकाओं का प्रकाशन बंद कराकर, उन्हें कलकत्ता से रांची भेज दिया और नजरबंद कर दिया। चार साल बाद सन 1920 में नजरबंदी से रिहा होकर मौलाना आजाद दिल्ली आए तो पहली बार महात्मा गांधी से मिले और उनके सबसे करीबी सहयोगी बन गए। आजादी के बाद शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने बहुत अच्छा काम किया। देश की एकता और विकास के लिए समर्पित ऐसे व्यक्ति के जीवन को सबके सामने लाने की हमने एक कोशिश की है। मुझे यकीन है कि मौलाना आजाद के बारे में जानकर हमारी युवा पीढ़ी बहुत कुछ सीख सकती है।

कास्टिंग है परफेक्ट

डॉ. राजेंद्र संजय : फिल्म में मौलाना आजाद की भूमिका लिनेश फनसे ने निभाई है। उनका चुनाव ऑडिशन के बाद किया गया। लिनेश फनसे मराठी हैं, बड़ौदा में उनका जन्म हुआ है। वहीं पले-बढ़े, वहीं से एक्टिंग में डिप्लोमा किया और गोल्ड मेडलिस्ट हैं। वह फिल्म के लिए मोहम्मद अली जिन्ना के किरदार का ऑडिशन देने आए थे। मैंने उनसे कहा कि आप जिन्ना के किरदार में बिल्कुल फिट नहीं होंगे। यह सुनकर लिनेश बड़े निराश हो गए। इसके बाद मैंने कहा कि मैं आपको मौलाना आजाद का किरदार देना चाहता हूं, यह सुनकर वह हैरान रह गए। दरअसल, जब मैंने लिनेश को देखा था तो उनकी हाइट और चेहरा मौलाना आजाद की तरह लगा, यही वजह है कि उन्हें सेलेक्ट किया। लिनेश ने भी काफी मेहनत की अपने किरदार को निभाने के लिए। एक मराठी एक्टर के लिए उर्दू बोलना थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन वह मेरे यहां उर्दू सीखने के लिए महीनों आते रहे। साथ ही लिनेश ने मौलाना आजाद के हाव-भाव और उनकी बॉडी लैंग्वेज को समझने की कोशिश की, उन्हीं के अंदाज में बात करने का प्रयास किया।

सिचुएशनल सॉन्ग्स

संजय सिंह नेगी : हमारी फिल्म में तीन गाने हैं। एक टाइटल सॉन्ग है, बाकी दो सिचुएशनल गाने हैं। गांधीजी की मृत्यु के समय एक सिचुएशनल गाना है, जो मौलाना आजाद पर फिल्माया गया है। हम सभी जानते हैं कि मौलाना आजाद, गांधी जी के बहुत करीब थे और उनके जाने का मौलना आजाद को बहुत दुख हुआ था। इस फिल्म के संगीतकार दर्शन कहार हैं और गाने डॉ. राजेंद्र संजय ने ही लिखे हैं।

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