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दीपिका कक्कड़ ने ''कयामत की रात'' का बताया सच, बताई उस रात की सच्ची घटना

सीरियल ‘नीर भरे तेरे नैना देवी’ से टीवी वर्ल्ड में एंट्री करने वालीं दीपिका कक्कड़ को इंडस्ट्री में पहचान और पॉपुलैरिटी ‘ससुराल सिमर का’ से मिली। साथ ही वे ‘झलक दिखला जा’ और ‘नच बलिए’ जैसे डांस शोज में भी नजर आई हैं।

दीपिका कक्कड़ ने

सीरियल ‘नीर भरे तेरे नैना देवी’ से टीवी वर्ल्ड में एंट्री करने वालीं दीपिका कक्कड़ को इंडस्ट्री में पहचान और पॉपुलैरिटी ‘ससुराल सिमर का’ से मिली। साथ ही वे ‘झलक दिखला जा’ और ‘नच बलिए’ जैसे डांस शोज में भी नजर आईं।

कुछ समय पहले वह ‘एंटरटेनमेंट की रात’ में स्टैंडअप कॉमेडी भी करती दिखीं। बहरहाल, अब वो सीरियल ‘कयामत की रात’ में सुहासिनी का रोल निभा रही हैं।

सीरियल ‘कयामत की रात’ में ऐसा क्या खास लगा, जिसके चलते आपने इसे एक्सेप्ट किया?

‘कयामत की रात’ करने की सबसे बड़ी वजह यह थी कि यह सीरियल बालाजी टेलीफिल्म्स का है। इंडियन टेलीविजन की क्वीन कही जाने वालीं एकता कपूर के साथ काम करने का मौका भला कोई भी एक्ट्रेस कैसे छोड़ सकती है।

इसके साथ ही इस सीरियल में मेरा जो किरदार है, वो बहुत ही स्ट्रॉन्ग है और कहानी में उसे काफी अहमियत भी दी गई है। इस बात का अहसास तो मुझे उसी वक्त हो गया था, जब मैंने सीरियल की कहानी सुनी थी। सच कहूं तो उसी वक्त सुहासिनी के किरदार से मैं इंप्रेस हो गई थी। इसलिए मेरे पास ना कहने का कोई कारण ही नहीं था।

इस सीरियल का नाम ‘कयामत की रात’ क्यों रखा गया है?

यह एक फैंटेसी, थ्रिलर, फिक्शन जॉनर पर बेस्ड सीरियल है। जिसे देखने पर डर भी लगेगा और सस्पेंस होने की वजह से आगे क्या होगा यह जानने की जिज्ञासा भी बनी रहेगी। इसे बहुत ही खूबसूरत और नए लोकेशंस पर शूट किया गया है।

इससे भी ये ऑडियंस के लिए सेंटर ऑफ अट्रैक्शन बन सकता है। जहां तक सवाल इसके नाम का है, दरअसल यह सीरियल एक रात से ही शुरू होगा और एक रात ऐसा कुछ होगा, जो मेरे किरदार की जिंदगी पलट देगा, और उसके बाद भी हमें उसी रात का इंतजार रहेगा, यानी शुरू से अंत तक रात ही खास होगी, इसलिए इसका नाम ‘कयामत की रात’ रखा गया है।

सीरियल में आपका किरदार किन मायनो में स्ट्रॉन्ग है?

सीरियल में मैं सुहासिनी नाम की लड़की का किरदार निभा रही हूं, जो बहुत ही सिंपल और प्यारी है। सुहासिनी में हर लड़की अपनी झलक देख सकती है, क्योंकि कोई भी औरत कभी अपने परिवार पर आंच आने नहीं देती और अगर कभी ऐसा कुछ हो भी जाए, तो वो उसका डटकर मुकाबला करती है।

सीरियल में सुहासिनी भी इसी तरह अपनी फैमिली के लिए सख्त स्टैंड लेती है। दरअसल, वो शादी के तुरंत बाद अपने पति के साथ एक मंदिर में दर्शन के लिए जाती है। वहां उसके साथ कुछ ऐसा होता है कि उसे अपने परिवार के लिए कड़ा कदम उठाना पड़ता है।

सीरियल में तांत्रिक, भूत-प्रेत दिखाए गए हैं, असल जिंदगी में आप इनमें कितना विश्वास रखती हैं?

बिल्कुल भी नहीं (हंसते हुए) लेकिन मैं उन्हें चैलेंज नहीं दे रही हूं। मैं तो यही कहूंगी कि अगर भूत होते होंगे, तो वो अपनी ही दुनिया में रहें। मैं खुश हूं कि आज तक मेरा कभी तांत्रिक या भूत-प्रेत से पाला नहीं पड़ा है, भगवान ना करे कि आगे चलकर कभी सामना हो।

हां, मैं इस बात पर पूरा यकीन करती हूं कि जिस तरह पॉजिटिव एनर्जी होती है, उसी तरह नेगेटिव एनर्जी भी होती है। जैसे अच्छाई है तो बुराई भी है, उसी तरह शैतान या बुरी शक्तियां भी शायद होती होंगी।

आपको नहीं लगता कि इस तरह के सीरियल समाज में अंधविश्वास को बढ़ावा देते हैं?

मेरे मुताबिक ऐसे सीरियल सिर्फ और सिर्फ दर्शकों के मनोरंजन के लिए बनाए जाते हैं ना कि उन्हें यह विश्वास दिलाने के लिए कि ऐसा भी होता है। उन्हें पहले ही सचेत कर दिया जाता है कि यह महज एक काल्पनिक कहानी है, बिल्कुल वैसी जैसी हमने बचपन में विक्रम-बेताल की सुनी है। दर्शक इन बातों पर यकीन करें, हमारा यह मकसद नहीं होता है।

आपने सीरियल्स तो किए ही हैं, हाल ही में स्टैंडअप कॉमेडी भी की, दोनों में कितना फर्क देखती हैं?

मेहनत तो दोनों में ही बहुत लगती है, लेकिन मुझे लगता है कि सीरियल्स में एक्टिंग करते-करते मुझे एक्टिंग की आदत हो गई हैं, इसलिए कहीं ना कहीं मेरे लिए एक्टिंग ज्यादा आसान हो गई है। शायद, उतनी पकड़ स्टैंडअप कॉमेडी में नहीं आ पाई है।

स्टैंडअप कॉमेडी में आपको ऑडियंस को पकड़कर रखना पड़ता है, अगर आप चूके तो वहां बैठी लाइव ऑडियंस भी निराश हो जाती है, जबकि सीरियल्स में कई नए टेक लेकर एक्टिंग को अच्छा बनाया जा सकता है। इसलिए मेरी मानें तो स्टैंडअप कॉमेडी बहुत ही मुश्किल काम है।

फिल्म ‘पलटन’ में इमोशनल रोल

दीपिका कक्कड़ बहुत जल्द डायरेक्टर जे. पी. दत्ता की फिल्म ‘पलटन’ में नजर आएंगी। इस फिल्म और फिल्म में अपने किरदार के बारे में पूछे जाने पर वह बताती हैं, ‘मैंने पहले कभी नहीं सोचा था कि मैं बॉलीवुड में काम करूंगी, लेकिन बाई लक मुझे यह मौका मिला वो भी डायरेक्टर जे. पी. दत्ता की फिल्म में।

दत्ता साहब पहले ‘बॉर्डर’ और ‘एल ओ सी’ जैसी फिल्में बना चुके हैं, फिल्म ‘पलटन’ भी उसी टाइप की फिल्म है। इसमें मैं एक हरियाणवी लड़की का रोल प्ले कर रही हूं। उसका मंगेतर आर्मी में है, सगाई के तुरंत बाद ही उसके मंगेतर को बॉर्डर पर बुला लिया जाता है।

ऐसे में उसके मन में उसे खोने का डर भी है और कहीं ना कहीं वो उसे अपने कर्तव्य को निभाने के लिए सपोर्ट भी करती है। फिल्म की कहानी बहुत ही इमोशनल है।’

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