Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

जब पृथ्वी थिएटर के लिए खुद जुटाते थे पैसे, ऐसे बीता अभिनेता पृथ्वीराज कपूर का जीवन

पृथ्वीराज कपूर भारतीय सिनेमा और रंगमंच के एक प्रसिद्ध अभिनेता थे। पृथ्वीराज कपूर ने अपने जीवन के 40 साल फिल्मी जगत में गुजारे हैं। उन्होंने 1942 में पृथ्वी थिएटर की स्थापना की।

जब पृथ्वी थिएटर के लिए खुद जुटाते थे पैसे, ऐसे बीता अभिनेता पृथ्वीराज कपूर का जीवन

पृथ्वीराज कपूर भारतीय सिनेमा और रंगमंच के एक प्रसिद्ध अभिनेता थे। पृथ्वीराज कपूर ने अपने जीवन के 40 साल फिल्मी जगत में गुजारे हैं। उन्होंने 1942 में पृथ्वी थिएटर की स्थापना की। पृथ्वी थिएटर में सबसे पहले कालिदास द्वारा रचित 'अभिज्ञानशाकुन्तलम' को पेश किया गया।

अपने काम को लेकर दीवाने रहने वाले पृथ्वीराज कपूर को पहला ब्रेक साल 1931 में फिल्म 'आलमआरा' से मिला। इस फिल्म में उन्होंने बतौर अभिनेता के रूप में काम किया।

इसे भी पढ़ेः #HumFitTohIndiaFit अजय देवगन के बेटे का वर्कऑउट वीडियो आया सामने, फैंस ने की खुलकर तारीफें

पृथ्वीराज कपूर को नाटकों, रंगमंच से काफी प्यार था। इसी कारण उन्होंने 15 जनवरी 1944 को पृथ्वी थिएटर बनाया और अपने अनेक कलाकारों को रंगमंच से जोड़ा।उन्होंने दीवार, पठान, गद्दार, आहुति, शकुन्तला, पैसा, कलाकार और किसान शीर्षक नाटको को रंगमंच पर उतारा।

पृथ्वीराज कपूर का जन्म 3 नबंबर 1906 को पंजाब के लायलपुर में हुआ। 18 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई। 1928 में वह फिल्मी दुनिया में काम करने के लिए मुंबई रवाना हुए और कई साल संघर्ष किया।

पृथ्वीराज कपूर को पद्मभूषण पुरस्कार दिया गया। भारतीय सिनेमा में अपने अदभूत योगदान के लिए उन्हें 1971 में मरणोपरांत दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

एक बार पृथ्वीराज कपूर ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को प्रस्ताव ठुकरा दिया। नेहरू ने उन्हें विदेश में होने वाले सांस्कृतिक प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने को कहा लेकिन पृथ्वी ने यह कहकर उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया कि वे थिएटर के काम को छोड़कर विदेश नही जाएंगे।

इसे भी पढ़ेः कॉमेडियन सुनील ग्रोवर और उनकी टीम ने कुछ इस अंदाज में क्रिकेट कॉमेडी और शो को कहा अलविदा, देखें वीडियो

पृथ्वीराज कपूर ने अपने करियर के दौरान कई फिल्मों में अभिनय किया है। पृथ्वीराज कपूर की मुगले आजम, हरिश्चंद्र तारामती, सिकंदरे आजम, आसमान, महल जैसी कुछ सफल फिल्में प्रदर्शित हुई।

पृथ्वीराज कपूर ने गुमनामी के अंदेरे में जा रहे पंजाबी सिनेमा को एक नया जीवन दिया। साल 1969 में उन्होंने एक पंजाबी फिल्म 'नानक नाम जहां है' में अभिनय किया।

29 मई 1972 को फिल्मी जगत के बड़े सितारे पृथ्वीराज कपूर ने अपनी अंतिम सांसे ली और अभिनेताओं की दुनिया से एक और सितारे ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया और हमने एक बेहतरीन कलाकार को खो दिया।

पृथ्वीराज कपूर तो आज नही हैं लेकिन आज उनकी पीढ़ियां बॉलीवुड में अपनी सफलता के झंड़े गाड़ रही हैं। आज कपूर खानदान उनकी मृत्यु के 50 वर्ष बाद भी फिल्मी दुनिया में सक्रिय है।

Next Story
Top