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Blank Movie Review : सस्पेंस और थ्रिलर से भरी है फिल्म 'ब्लैंक'

सनी देओल, करण कपाड़िया की सुपर सस्पेंस फिल्म 'ब्लैंक' आज रिलीज हो गयी है। फिल्म का नाम भले ही ब्लैंक हो लेकिन फिल्म की कहानी का प्लॉट काफी अच्छा और सुलझा हुआ है। जानिए फिल्म की पूरी रिपोर्ट

Blank Movie Review : सस्पेंस और थ्रिलर से भरी है फिल्म
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करण कपाड़िया की डेब्यू फिल्म 'ब्लैंक' एक अच्छे प्लॉट पर बनाई गयी सस्पेंस फिल्म है। फिल्म में सनी देओल का होना प्लस पॉइंट है। लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कितना कमाल कर पायेगी यह कह पाना फिलहाल मुश्किल है। फिल्म देश से गद्दारी करने वाले वाले आंतकी को खत्म करने की कहानी पर आधारित जिसकी स्क्रिप्ट को अगर थोड़ा और संभाला जाता तो फिल्म को काफी फायदा होता । एक गुंडे के आतंकवादी बनकर अपने ही देश से गद्दारी करना और उसके खात्मे की कहानी है ब्लैंक।

फिल्म की कहानी

हनीफ (करण कपाड़िया) के पिता की हत्या उसकी आंखों के सामने की जाती है जिसे वो भूल नहीं पाता और बड़े होने के बाद भी उसे अपने पिता की हत्या की दुखद यादें दिखाई देती हैं। इस कारण वह परेशान रहता है। हनीफ को पुलिस और एंटी टेरेरिज्म स्क्वाड (एटीएस) से लड़ना पड़ता है। जांच में पता चलता है कि हनीफ के शरीर पर लगे बम के तार अन्य 24 लोगों के बम से जुड़े हैं और आतंकवादी मकसूद (जमील खान) जिहाद के नाम पर उनका इस्तेमाल करके शहर में 25 धमाके कर आतंक फैलाना चाहता है।

हनीफ को एटीएस द्वारा पकड़ तो लिया जाता है लेकिन वो बचकर निकल जाता है। ऐसे में सस्पेंस इस बात को लेकर बरकरार रहता है कि हनीफ आतंक क्यों फैलाना चाहता है? हनीफ क्यों अपने देश से गद्दारी करता है? इन सवालों के जवाब के लिए आपको फिल्म देखनी होगी । फिल्म में एटीएस चीफ एसएस दीवान का किरदार सनी देओल ने निभाया है। एसएस दीवान की टीम में हुस्ना (इशिता दत्ता) और रोहित (करणवीर शर्मा) होते हैं तो साथ मिलकर तफ्तीश करते हैं।


एक्टिंग

करण कपाड़िया ने फिल्म ब्लैंक के जरिये काफी अलग और इंट्रेस्टिंग डेब्यू किया है। फिल्म में उनकी एक्टिंग बेहद शानदार है। सनी देओल का अंदाज वही है जिसके लिए सनी मशहूर हैं। एटीएस चीफ एसएस दीवान का किरदार सनी देओल ने अच्छा निभाया है। इशिता दत्ता और करणवीर शर्मा ने भी अपना किरदार ठीक निभाया है। आतंकी सरगना मकसूद के किरदार में जमील खान ने शानदार एक्टिंग की है जो दर्शकों के मन में छाप छोड़ेगी। आखिर में प्रमोशनल गीत 'अली-अली' में अक्षय कुमार और करण कपाड़िया नजर आते हैं लेकिन ये गाना जबरदस्ती ठूसा गया लगता है जो फिल्म के हिसाब से बिल्कुल भी मेल खाता नजर नहीं आता।

एक्शन - डायरेक्शन

डायरेक्टर 'बेहजाद खंबाटा' का डायरेक्शन अच्छा है जो फिल्म में सस्पेंस को आखिर तक बनाये रखने में सफल रहता है । फिल्म को अगर और परफेक्शन के साथ बनाया जाता तो काफ़ी कुछ फ़र्क नज़र आ सकता था l चुस्त एडिटिंग से फिल्म की स्पीड और स्टोरी और दमदार हो सकती थी। सस्पेंस और थ्रिलर के शौकीन दर्शकों के लिए फिल्म एक अच्छा वीकेंड ऑप्शन है जो एक बार तो देखी ही जा सकती है l

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