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''बत्ती गुल मीटर चालू'' में एक सीरियस मुद्दे को हाईलाइट करने की कोशिश की गई हैः शाहिद कपूर

शाहिद कपूर ने अपने करियर की शुरुआत चॉकलेटी हीरो के तौर पर की थी। लेकिन धीरे-धीरे वह मैच्योर एक्टर होते गए और ऐसी फिल्में करने लगे, जिनमें एक्टिंग की भरपूर गुंजाइश हो और दर्शकों को एंटरटेनमेंट के साथ मैसेज भी मिले।

शाहिद कपूर ने अपने करियर की शुरुआत चॉकलेटी हीरो के तौर पर की थी। लेकिन धीरे-धीरे वह मैच्योर एक्टर होते गए और ऐसी फिल्में करने लगे, जिनमें एक्टिंग की भरपूर गुंजाइश हो और दर्शकों को एंटरटेनमेंट के साथ मैसेज भी मिले।

‘हैदर’ और ‘उड़ता पंजाब’ इस लिस्ट में सबसे उम्दा फिल्में रही हैं। फिर ‘पद्मावत’ में भी वह राजपूत राजा रतन सिंह के रोल में नजर आए। शाहिद एक बार फिर मैसेज देने वाली फिल्म ‘बत्ती गुल मीटर चालू’ में बिजली की प्रॉब्लम को हाईलाइट करेंगे। इसमें उनके अपोजिट श्रद्धा कपूर हैं।

आप अपनी फिल्म ‘बत्ती गुल मीटर चालू’ के बारे में क्या कहना चाहेंगे?

यह फिल्म इलेक्ट्रिकसिटी प्रॉब्लम पर बेस्ड है। आज भी हमारे देश में लाखों घर ऐसे हैं, जहां पर बिजली नहीं है। कुछ शहर ऐसे भी हैं, जहां बिजली तो आती नहीं है, फिर भी मीटर चालू है। एक-दो शहर ऐसे भी हैं, जहां पर स्ट्रीट लाइट तो जल रही है, लेकिन घरों में बिजली नहीं है।

लिहाजा लोग स्ट्रीट लाइन से बिजली के तार घर में खींच कर बिजली ले लेते हैं। पहले तो फिर भी ठीक था, अब जब से बिजली का प्राइवेटाइजेशन हुआ है, तब से बिल इतना ज्यादा आता है कि छोटे-छोटे गांव-शहर तो छोड़िए, मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों की भी हालत खराब है। हमने इसी प्रॉब्लम को अपनी फिल्म में एंटरटेनमेंट के जरिए दिखाने की कोशिश की है।

आपकी फिल्म में उत्तराखंड का बैकड्रॉप है। इस जगह को सेलेक्ट करने की कोई खास वजह?

यह तो आपको फिल्म के डायरेक्टर ज्यादा अच्छे से बता पाएंगे। लेकिन फिल्म में कुछ और बातें भी दिखाई गई हैं, जो सिर्फ उत्तराखंड के बैकड्रॉप पर दिखाई जा सकती थीं।

आपने इस फिल्म के लिए लोकल लैंग्वेज टोन पर काम किया है। डायलॉग वहीं के स्टाइल में बोले हैं?

हम लोगों को पहाड़ी स्टाइल में डायलॉग बोलने में बहुत मजा आया। जब हमें पता चला कि इस तरह डायलॉग बोलने हैं, शुरू में तो हम हड़बड़ाए हुए थे। मैंने और श्रद्धा ने डायलॉग बोलने के लिए कई रीडिंग सेशन किए। बाद में सब कुछ आसानी से हो गया। हमने अपने डायलॉग्स में लोकल वर्ड भी बहुत इस्तेमाल किए हैं।

फिल्म में आपका रोल क्या है?

मैं इसमें वकील का किरदार निभा रहा हूं, जो बिजली से रिलेटेड प्रॉब्लम से बेहाल लोगों के लिए फाइट कर रहा है।

आपने अपनी फिल्म में सीरियस इश्यू को ह्यूमर के जरिए कहने की कोशिश की है। आपको लगता है ह्यूमर के जरिए बात कहना आसान होता है?

हां, हंस-हंस के अगर हम कुछ कहें तो लोग बुरा नहीं मानते। अगर हम उसी बात को सीरियस होकर कहेंगे तो दर्शक दिलचस्पी कम दिखाएंगे।

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