Car Mileage: नई कार खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल अक्सर यही होता है कि पेट्रोल कार ली जाए या सीएनजी। खासकर तब, जब बजट करीब 10 लाख रुपये तक हो। दोनों विकल्प अपने-अपने फायदे और सीमाओं के साथ आते हैं, इसलिए सही चुनाव आपकी रोजमर्रा की जरूरतों, ड्राइविंग पैटर्न और प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है।
ईंधन खर्च का असर
कार की रोजाना की रनिंग कॉस्ट पर सबसे ज्यादा असर ईंधन की कीमत का पड़ता है। आम तौर पर सीएनजी, पेट्रोल के मुकाबले सस्ती होती है, जिससे रोजाना चलाने वालों को अच्छी बचत मिलती है। बड़े शहरों जैसे दिल्ली और मुंबई में सीएनजी की कीमत अक्सर 80 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास रहती है, जबकि छोटे शहरों में यह 85 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो सकती है। फिर भी कुल मिलाकर सीएनजी, पेट्रोल की तुलना में ज्यादा किफायती विकल्प मानी जाती है।
माइलेज में कौन बेहतर?
माइलेज के मामले में सीएनजी कारें आमतौर पर आगे रहती हैं। जहां पेट्रोल कारें औसतन 15 से 22 किमी प्रति लीटर तक का माइलेज देती हैं, वहीं सीएनजी कारें करीब 22 से 35 किमी प्रति किलोग्राम तक चल सकती हैं। बेहतर माइलेज और कम खर्च की वजह से मारुति, टाटा और हुंडई जैसी कंपनियों की सीएनजी कारों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
परफॉर्मेंस और पावर
पावर और टॉर्क के मामले में पेट्रोल कारें सीएनजी से बेहतर मानी जाती हैं। ओवरटेक करते समय या हाईवे पर तेज रफ्तार में सीएनजी कारों में पावर की थोड़ी कमी महसूस हो सकती है। इसके उलट, पेट्रोल कारें बेहतर पिक-अप, स्मूद ड्राइव और ज्यादा संतुलित परफॉर्मेंस देती हैं, जिससे लंबी दूरी के सफर में ज्यादा आराम मिलता है।
आपके लिए कौन सा विकल्प सही?
अगर आप रोज शहर के अंदर लंबी दूरी तय करते हैं और ईंधन खर्च कम रखना चाहते हैं, तो सीएनजी कार एक किफायती और व्यावहारिक विकल्प है। वहीं अगर आपके लिए बेहतर एक्सीलरेशन, ज्यादा पावर और हाईवे ड्राइविंग महत्वपूर्ण है, तो पेट्रोल कार चुनना ज्यादा समझदारी भरा फैसला होगा।
(मंजू कुमारी)











