Hybrid Car: हाइब्रिड कार एक ऐसी आधुनिक तकनीक वाली गाड़ी है, जिसमें पारंपरिक इंटरनल कंबशन इंजन (पेट्रोल या डीजल) के साथ एक या ज्यादा इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बेहतर माइलेज देना, टेलपाइप उत्सर्जन कम करना और पावर डिलीवरी को ज्यादा प्रभावी बनाना होता है। इन कारों में एक बैटरी पैक होता है, जो इलेक्ट्रिक ऊर्जा को स्टोर करता है और इंजन के साथ मिलकर एक्सिलरेशन, क्रूजिंग और ब्रेकिंग के दौरान गाड़ी को सपोर्ट करता है। अलग-अलग कंपनियों की तकनीक भले ही अलग हो, लेकिन मूल सिद्धांत एक ही होता है—इंजन पर निर्भरता कम कर इलेक्ट्रिक पावर का इस्तेमाल बढ़ाना।
हाइब्रिड कार कैसे काम करती है?
हाइब्रिड कार में दो मुख्य पावर सोर्स होते हैं—इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर। इलेक्ट्रिक मोटर को हाई-वोल्टेज बैटरी से ऊर्जा मिलती है। यह बैटरी रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग से चार्ज होती है, यानी ब्रेक लगाने पर उत्पन्न ऊर्जा वापस बैटरी में स्टोर हो जाती है। कुछ सिस्टम में इंजन भी बैटरी को चार्ज करता है। कम स्पीड या ट्रैफिक में कार केवल इलेक्ट्रिक मोटर पर चल सकती है, जबकि ज्यादा स्पीड या पावर की जरूरत होने पर इंजन और मोटर दोनों साथ काम करते हैं। पूरा सिस्टम अपने आप ड्राइविंग कंडीशन के हिसाब से सही पावर सोर्स चुनता है।
हाइब्रिड सिस्टम के प्रकार
1) फुल हाइब्रिड: यह इंजन, इलेक्ट्रिक मोटर या दोनों से चल सकती है और कुछ दूरी तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक मोड में भी चलती है।
2) माइल्ड हाइब्रिड: इसमें इलेक्ट्रिक मोटर सिर्फ इंजन को सपोर्ट करती है और गाड़ी अकेले बिजली से नहीं चलती।
3) प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV): इसमें बड़ी बैटरी होती है, जिसे बाहरी पावर सोर्स से चार्ज किया जा सकता है और यह ज्यादा दूरी तक इलेक्ट्रिक मोड में चल सकती है।
फायदे और सीमाएं
हाइब्रिड कारें बेहतर माइलेज, कम ईंधन खर्च, कम प्रदूषण और स्मूद ड्राइविंग अनुभव देती हैं। हालांकि, इनकी शुरुआती कीमत ज्यादा होती है और बैटरी बदलने का खर्च भी आ सकता है।
क्या यह भविष्य की तकनीक है?
हाइब्रिड टेक्नोलॉजी को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर एक मध्यवर्ती कदम माना जाता है। जो लोग पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए तैयार नहीं हैं, उनके लिए हाइब्रिड कार एक व्यावहारिक और संतुलित विकल्प बनती जा रही है।
(मंजू कुमारी)










