डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने लगाई जनचौपाल: लोगों की समस्याओं का किया निराकण, बोले- बोले- नक्सली हिंसा का छोड़कर मुख्यधारा में आएं
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने ओरछा गांव में जनचौपाल लगाई। यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि वर्षों से खामोश रहे लोगों की आवाज़ का मंच बन गया।
लोगों को संबोधित करते डिप्टी सीएम विजय शर्मा
इमरान खान- नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने गुरुवार को जिले के ओरछा गांव में जनचौपाल लगाई। यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि वर्षों से खामोश रहे लोगों की आवाज़ का मंच बन गया। ओरछा की धरती ने बहुत कुछ देखा है। बंदूक की आवाज़, भय की रातें और विकास की राह में बिछी अनगिनत बाधाएं। यहां के बुजुर्ग बताते हैं कि एक समय ऐसा था जब बच्चों की हंसी भी दबे स्वर में सुनाई देती थी। सड़कें नहीं थीं, बिजली सपना थी और सरकारी योजनाएं नाम मात्र की। लेकिन गुरुवार को उसी ओरछा में जब चौपाल सजी, तो माहौल बदला हुआ था। आंखों में डर नहीं, बल्कि उम्मीद झलक रही थी।
गृह मंत्री विजय शर्मा जब ग्रामीणों के बीच पहुंचे, तो उन्होंने किसी मंच से नहीं, बल्कि लोगों के बीच बैठकर बात की। मांझी-चालकी, समाज प्रमुख, महिलाएं और युवा- सब अपनी-अपनी कहानियां लेकर आए। किसी ने कहा कि, साहब, पहले शाम होते ही घर से निकलना मुश्किल था। किसी ने बताया कि अब सड़क और बिजली आने से जिंदगी आसान हुई है। यह बातें सरकारी आंकड़े नहीं थीं, यह उस बदलाव की गवाही थीं, जिसे अबूझमाड़ महसूस कर रहा है।
हिंसा के साथ विकास संभव नहीं
श्री शर्मा ने चौपाल में कहा कि हिंसा के साथ विकास संभव नहीं है। उन्होंने भटके हुए युवाओं से मुख्यधारा में लौटने की अपील की और समाज प्रमुखों से आग्रह किया कि वे उन्हें समझाकर पुनर्वास की राह दिखाएं। यह अपील केवल नीति की बात नहीं थी, बल्कि उन परिवारों के लिए एक उम्मीद थी, जिन्होंने अपने बेटों को गलत रास्ते पर जाते देखा है।
स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने रखी अपनी मांगे
चौपाल में महिलाओं की मौजूदगी खास थी। ओरछा की स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने अपनी बात रखते हुए कहा कि अगर उन्हें संसाधन मिलें, तो वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकती हैं। गृह मंत्री ने महतारी सदन और स्टोरेज निर्माण का आश्वासन दिया। यह घोषणा केवल एक इमारत की नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नींव थी।अबूझमाड़ के तोयनार और कोड़मेटा गांवों में सड़क निर्माण की स्वीकृति की खबर सुनते ही ग्रामीणों के चेहरों पर मुस्कान फैल गई। सड़क यहां केवल रास्ता नहीं, बल्कि दुनिया से जुड़ने की डोर है।
नक्सल मुक्त गांवों को देंगे एक करोड़ रुपये
चौपाल में यह भी तय हुआ कि जो गांव स्वयं को नक्सल हिंसा से मुक्त घोषित करेंगे, उन्हें अतिरिक्त एक करोड़ रुपये विकास के लिए दिए जाएंगे। कार्यक्रम के अंत में जब 20 छात्राओं को निःशुल्क सरस्वती सायकल योजना के तहत सायकल मिली, तो वह दृश्य सबसे मार्मिक था। सायकल थामे उन बेटियों की आंखों में भविष्य की चमक थी- एक ऐसा भविष्य, जो अब डर से नहीं, सपनों से भरा होगा।
जन चौपाल से लोगों को उम्मीदें
ओरछा की यह चौपाल बताती है कि अबूझमाड़ केवल एक भूगोल नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और बदलाव की कहानी है। बंदूक की छाया से निकलकर भरोसे की रोशनी की ओर बढ़ता अबूझमाड़ आज खुद कह रहा है- अब यहां शांति का रास्ता खुल चुका।