नक्सल प्रभावित कोंटा में मातृत्व अभियान: गर्भवती महिलाओं की हुई विशेष जाँच, माओवाद के गढ़ से मातृत्व सुरक्षा को मिली नई राह

सुकमा जिले के सुदूर अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अब धरातल पर दिखने लगी है। कोंटा में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस का भव्य आयोजन किया गया।

Updated On 2026-01-09 17:18:00 IST

माओवाद के गढ़ से मातृत्व सुरक्षा को मिली नई राह

लीलाधर राठी - सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के सुदूर अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अब धरातल पर दिखने लगी है। कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशन में आज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कोंटा में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस का भव्य आयोजन किया गया। इस शिविर की सबसे बड़ी उपलब्धि किस्टाराम, गोलापल्ली और जगरगुंडा जैसे घोर नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं का अस्पताल पहुँचना रहा।

स्पेशलिस्ट सेवाओं से सुसज्जित रहा शिविर
बीएमओ कोंटा डॉ. दीपेश चंद्राकर ने बताया कि, स्वास्थ्य केंद्र में कुल 64 महिलाओं का ओपीडी पंजीकरण किया गया। शिविर में आईडीओ फाउंडेशन के सहयोग से स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रिपेका सात्विक ने अपनी सेवाएँ दीं। विशेष रूप से 35 हाई रिस्क (उच्च जोखिम) वाली गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड टेस्ट किया गया, जिससे गर्भ में पल रहे शिशु की स्थिति और मां के स्वास्थ्य का सटीक आकलन हो सका और उन्हें बेहतर उपचार सुविधा उपलब्ध कराया गया।


गर्म भोजन और पोषण पर विशेष ध्यान
अस्पताल पहुंची महिलाओं के लिए केवल जांच ही नहीं, बल्कि पोषण का भी पूरा ख्याल रखा गया। शासन की योजना के अनुरूप सभी गर्भवती महिलाओं को गर्म भोजन और अंडा परोसा गया। साथ ही विशेषज्ञों द्वारा खान-पान और सुरक्षित प्रसव को लेकर उचित परामर्श भी दिया गया।

क्या है PMSMA और इसकी सुविधाएँ?
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान हर माह की 9 और 24 तारीख को सभी प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। अभियान के तहत निम्नलिखित सुविधाएँ निःशुल्क प्रदान की जाती हैं। सभी प्रकार की खून जाँच और अल्ट्रासाउंड। गर्भ में बच्चे की स्थिति और उचित पोषण की सलाह। परिवहनरू गर्भवती महिलाओं को घर से अस्पताल लाने और वापस छोड़ने की मुफ्त व्यवस्था। निःशुल्क दवाइयां और विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा परीक्षण।


सुदूर वनांचलों तक पहुँची मुस्कान
किस्टाराम, मरईगुड़ा और जगरगुंडा जैसे क्षेत्रों से महिलाओं को अस्पताल तक लाना प्रशासन की एक बड़ी जीत मानी जा रही है। जिला प्रशासन के इस प्रयास से न केवल सुरक्षित प्रसव की दर बढ़ेगी, बल्कि अंदरूनी क्षेत्रों के ग्रामीणों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास भी सुदृढ़ होगा। 

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