कवर्धा जिले से 7 करोड़ का धान गायब: खरीदी केंद्र प्रभारी निलंबित, ऊटपटांग जवाब देने पर कारण बताओ नोटिस भी जारी

कवर्धा जिले में साल 2024-25 में खरीदे गए करीब 7 करोड़ रुपये का धायब है। इसकी जांच पर जवाबदार अधिकारी ने चूहों के खा जाने की बात कही थी।

Updated On 2026-01-09 19:46:00 IST

हरिभूमि डॉट कॉम की खबर 

कवर्धा। सात करोड़ का धान गायब होने के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। संग्रहण केन्द्र प्रभारी को प्रीतेश पांडेय को कलेक्टर ने निलंबित कर दिया है। डीएमओ को अनाब-शनाब बयान देने पर शो काज नोटिस भी जारी किया गया है। इसके अलावा संग्रहण केन्द्र की नए सिरे से होगी जांच, पांच सदस्यीय टीम इसके लिए गठित कर दी गई है।

उल्लेखनीय है कि, छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में सात करोड़ रुपये का धान गायब है। जवाब में अधिकारी कहते हैं — धान चोरी नहीं हुआ, धान बिक नहीं गया, बल्कि चूहे, दीमक और कीड़े खा गए। लेकिन इसी बयान के साथ अधिकारी यह भी जोड़ते हैं कि, प्रदेश के दूसरे जिलों में स्थिति और भी खराब है। यानि अपनी नाकामी छिपाने के लिए अब पूरे प्रदेश में धान संग्रहण व्यवस्था की पोल खोली जा रही है।

इस संबंध में जब जवाबदार अधिकारी से पूछा गया तो अधिकारी बेशर्मी से कह रहे हैं कि, हमारी स्थिति प्रदेश के बाकी जगहों से ठीक है। यह पूरा मामला कवर्धा जिले के बाज़ार चारभाठा और बघर्रा संग्रहण केंद्रों का है। साल 2024-25 में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए लगभग 7 लाख 99 हजार क्विंटल धान में से 26 हजार क्विंटल धान की कमी पाई गई। अकेले बाज़ार चारभाठा केंद्र से 22 हजार क्विंटल धान गायब मिला, जिसकी कीमत करीब 7 करोड़ रुपये आँकी जा रही है।

अफसरों के ऐसे कुतर्क
जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा का कहना है कि, धान की जो कमी सामने आई है, वह मौसम के प्रभाव और चूहे, दीमक व कीड़ों द्वारा नुकसान के कारण हुई है। पूरे प्रदेश के 65 संग्रहण केंद्रों की तुलना में हमारे जिले की स्थिति बेहतर है। यानि कवर्धा में 26 हजार क्विंटल धान चूहों और दीमक ने खा लिया, और तर्क यह दिया जा रहा है कि, क्योंकि कहीं और हालात और खराब हैं, इसलिए यहाँ चिंता की बात नहीं है।


केंद्र प्रभारी के खिलाफ शिकायत, जांच में सही
जबकि दूसरी ओर संग्रहण केंद्र बाजार चारभाठा के प्रभारी पर फर्जी आवक-जावक दिखाने, डैमेज धान खरीदी के फर्जी बिल बनाने मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाने और CCTV कैमरों से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप दर्ज कराए गए हैं। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने की बात भी सामने आई है।

उठ रहे ये सवाल
सीधा सवाल यह है कि, अगर धान चूहे-दीमक ने खाया, तो फिर फर्जी बिल किसने बनाए? फर्जी एंट्री किसने की? CCTV से छेड़छाड़ किसने की? इसका मतलब साफ है कि, कवर्धा में धान घोटाले पर एक तरफ अधिकारी चूहे-दीमक को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, तो दूसरी तरफ अपनी कमजोरी छिपाने के लिए पूरे प्रदेश में धान संग्रहण व्यवस्था की गड़बड़ी उजागर कर रहे हैं। बहरहाल यहां सवाल यह नहीं कि, धान चूहे खा गए या दीमक… सवाल यह है कि, जिम्मेदारी कौन खा गया?

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