कवर्धा जिले से 7 करोड़ का धान गायब: अफसर कह रहे- चूहे, दीमक और कीड़े खा गए, फिर भी प्रदेश में हमारी स्थिति बेहतर

धान संग्रहण व्यवस्था की गड़बड़ी
संजय यादव - कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में सात करोड़ रुपये का धान गायब है। जवाब में अधिकारी कहते हैं — धान चोरी नहीं हुआ, धान बिक नहीं गया, बल्कि चूहे, दीमक और कीड़े खा गए। लेकिन इसी बयान के साथ अधिकारी यह भी जोड़ते हैं कि, प्रदेश के दूसरे जिलों में स्थिति और भी खराब है। यानि अपनी नाकामी छिपाने के लिए अब पूरे प्रदेश में धान संग्रहण व्यवस्था की पोल खोली जा रही है।
कवर्धा जिले में साल 2024-25 में खरीदे गए लगभग 7 लाख 99 हजार क्विंटल धान में से 26 हजार क्विंटल धान की कमी पाई गई। जिसकी कीमत करीब 7 करोड़ रुपये आँकी जा रही है। @KabirdhamDist #Chhattisgarh #Paddyprocurement pic.twitter.com/5n87ebgjG6
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इस संबंध में जब जवाबदार अधिकारी से पूछा गया तो अधिकारी बेशर्मी से कह रहे हैं कि, हमारी स्थिति प्रदेश के बाकी जगहों से ठीक है। यह पूरा मामला कवर्धा जिले के बाज़ार चारभाठा और बघर्रा संग्रहण केंद्रों का है। साल 2024-25 में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए लगभग 7 लाख 99 हजार क्विंटल धान में से 26 हजार क्विंटल धान की कमी पाई गई। अकेले बाज़ार चारभाठा केंद्र से 22 हजार क्विंटल धान गायब मिला, जिसकी कीमत करीब 7 करोड़ रुपये आँकी जा रही है।
कवर्धा- जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा ने कहा- धान की जो कमी सामने आई है, वह मौसम के प्रभाव और चूहे, दीमक व कीड़ों द्वारा नुकसान के कारण हुई है। @KabirdhamDist #Chhattisgarh #Paddy pic.twitter.com/WjVbOrWeJD
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अफसरों के ऐसे कुतर्क
जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा का कहना है कि, धान की जो कमी सामने आई है, वह मौसम के प्रभाव और चूहे, दीमक व कीड़ों द्वारा नुकसान के कारण हुई है। पूरे प्रदेश के 65 संग्रहण केंद्रों की तुलना में हमारे जिले की स्थिति बेहतर है। यानि कवर्धा में 26 हजार क्विंटल धान चूहों और दीमक ने खा लिया, और तर्क यह दिया जा रहा है कि, क्योंकि कहीं और हालात और खराब हैं, इसलिए यहाँ चिंता की बात नहीं है।
कवर्धा जिले में सात करोड़ रुपये का धान गायब इस पर सहायता खाद्य अधिकारी मदन साहू ने कहा.. @KabirdhamDist #Chhattisgarh #Paddy pic.twitter.com/bq0IWkXvDX
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केंद्र प्रभारी के खिलाफ शिकायत, जांच में सही
जबकि दूसरी ओर संग्रहण केंद्र बाजार चारभाठा के प्रभारी पर फर्जी आवक-जावक दिखाने, डैमेज धान खरीदी के फर्जी बिल बनाने मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाने और CCTV कैमरों से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप दर्ज कराए गए हैं। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने की बात भी सामने आई है।
कवर्धा जिले में साल 2024-25 में खरीदे गए लगभग 7 लाख 99 हजार क्विंटल धान में से 26 हजार क्विंटल धान की कमी पाई गई। जिसकी कीमत करीब 7 करोड़ रुपये आँकी जा रही है। @KabirdhamDist#Chhattisgarh #Paddyprocurement pic.twitter.com/uEd2sfGcQR
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उठ रहे ये सवाल
सीधा सवाल यह है कि, अगर धान चूहे-दीमक ने खाया, तो फिर फर्जी बिल किसने बनाए? फर्जी एंट्री किसने की? CCTV से छेड़छाड़ किसने की? इसका मतलब साफ है कि, कवर्धा में धान घोटाले पर एक तरफ अधिकारी चूहे-दीमक को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, तो दूसरी तरफ अपनी कमजोरी छिपाने के लिए पूरे प्रदेश में धान संग्रहण व्यवस्था की गड़बड़ी उजागर कर रहे हैं। बहरहाल यहां सवाल यह नहीं कि, धान चूहे खा गए या दीमक… सवाल यह है कि, जिम्मेदारी कौन खा गया?
