अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में रखे 4 मजबूत तर्क: कहा- 'अगर तुरंत रिहा नहीं किया गया तो गलत परंपरा कायम होगी'

Arvind Kejriwal Supreme Court: अरविंद केजरीवाल को पिछले महीने 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। कहा था कि ईडी के पास पर्याप्त सबूत हैं कि अरविंद केजरीवाल एक्साइज पॉलिसी बनाने में शामिल थे।

Updated On 2024-04-11 08:33:00 IST
Arvind Kejriwal

Arvind Kejriwal Supreme Court: 'अगर मुझे आगामी लोकसभा चुनाव में हिस्सा लेने के लिए तुरंत रिहा नहीं किया जाता है तो इससे विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करने की गलत परंपरा स्थापित होगी...।' तिहाड़ जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यह तर्क सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में दिया। उन्होंने तत्काल सुनवाई की मांग की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया। इसे केजरीवाल के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। 

9 महीने से थे बयान, चुनाव के वक्त हुई गिरफ्तारी
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह याचिका इमरजेंसी सिचुएशन में दायर की जा रही है, क्योंकि दिल्ली के मौजूदा मुख्यमंत्री को लोकसभा चुनावों के बीच प्रवर्तन निदेशालय ने अवैध रूप से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी सह आरोपियों के बयानों के आधार पर की गई है, जो बाद में अप्रूवर यानी सरकारी गवाह बन गए। गवाहों के बयान और सबूत पिछले 9 महीने से ईडी के पास थे, फिर भी लोकसभा चुनाव के बीच गिरफ्तारी की गई। 

अरविंद केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए जो याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई है, उसमें ईडी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। हाईकोर्ट के फैसले और गवाहों के बयानों का भी जिक्र किया है। तो पढ़िए केजरीवाल ने क्या-क्या कहा?

1- ईडी ने खुद का इस्तेमाल होने दिया: केजरीवाल ने कहा कि ईडी ने खुद का इस्तेमाल होने दिया, जिससे न सिर्फ चुनाव के बीच राजनीतिक विरोधियों की स्वतंत्रता पर हमला किया गया, बल्कि उनकी प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाया गया। 

2- तो संविधान के मूल सिद्धांत खत्म हो जाएंगे: याचिका में कहा गया कि अगर केजरीवाल को तुरंत रिहा नहीं किया गया तो सत्ताधारी पार्टी की ओर से चुनाव से पहले विपक्षी पार्टी के प्रमुखों की गिरफ्तारी की मिसाल होगी। जिससे संविधान के मूल सिद्धांत खत्म हो जाएंगे।

3- सरकार गवाहों के बयान पूर्ण सत्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट में केजरीवाल ने दलील है कि हाईकोर्ट इस को समझ नहीं पाया कि सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज बयानों को पूर्णत: सत्य नहीं माना जाता है। अदालतें उन पर संदेह कर सकती हैं। बयानों को कभी भी तथ्यों की सच्चाई के ठोस सबूत के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल विरोधाभास और गवाह की पुष्टि के लिए किया जा सकता है। 

हाईकोर्ट ने क्या कहा था?: दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सरकारी गवाहों पर सवाल उठाना कोर्ट और मजिस्ट्रेट पर कलंक लगाने जैसा है। 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल।

4- मेरी गिरफ्तारी अवैध है: याचिका में कहा गया कि केजरीवाल को गिरफ्तार करने के लिए सी अरविंद, मंगुटा रेड्डी, शरथ रेड्डी के बयानों पर भरोसा किया गया है। लेकिन इन बयानों से स्पष्ट नहीं होता कि केजरीवाल ने पीएमएलए की धारा 3 के तहत कोई कमीशन का काम किया है।

इन बयानों से केजरीवाल के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है। बुची बाबू और राघव मंगुटा के बयान झूठे हैं। पीएमएलए की धारा 19 के तहत केजरीवाल की गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया जाए और उन्हें रिहा किया जाए। 

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