दिल्ली विधानसभा सचिवालय सख्त: आतिशी के 'डॉक्टर्ड' वीडियो के मामले में पंजाब पुलिस की बढ़ी मुश्किलें
पंजाब पुलिस ने दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी के कथित डॉक्टर्ड वीडियो क्लिप के आधार पर एफआईआर दर्ज करने पर नोटिस का जवाब देने के लिए दस दिन की मोहलत मांगी, लेकिन...
आतिशी के कथित डॉक्टर्ड वीडियो के आधार पर एफआईआर दर्ज करने को लेकर पंजाब पुलिस की मुश्किलें बरकरार।
पंजाब पुलिस ने आम आदमी पार्टी और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी के कथित डॉक्टर्ड वीडियो क्लिप के आधार पर एफआईआर दर्ज करने पर नोटिस का जवाब देने के लिए दस दिन की मोहलत मांगी, लेकिन दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया। दिल्ली विधानसभा के सचिव रंजीत कुमार ने जालंधर पुलिस कमिश्नर, पंजाब के विशेष महानिदेशक (साइबर क्राइम) और पंजाब के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर तीन दिन यानी 15 जनवरी तक जवाब देने को कहा है।
इससे पहले दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने पंजाब पुलिस के इन तीन अधिकारियों को नोटिस जारी कर 48 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा था। लेकिन मियाद खत्म होने पर पंजाब पुलिस के इन तीनों अधिकारियों ने सोमवार शाम को दिल्ली विधानसभा को पत्र भेजा, जिसमें नोटिस पर जवाब देने के लिए 10 दिन की मोहलत मांगी थी।
यह है पूरा मामला
दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा नेताओं ने एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें दावा किया गया था कि आतिशी ने सत्र के दौरान नौवें सिख गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। पंजाब की जालंधर पुलिस ने एक स्थानीय नेता इकबाल सिंह की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया था। पुलिस ने दावा किया कि फॉरेंसिक जांच से पता चला कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई और आतिशी ने गुरु शब्द का अपमानजनक संदर्भ में उपयोग नहीं किया। इस बारे में दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने जालंधर पुलिस कमिश्नर, पंजाब के विशेष महानिदेशक (साइबर क्राइम) और पंजाब के पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था।
इस वजह से मांगा स्पष्टीकरण
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के मुताबिक, पंजाब पुलिस की यह कार्रवाई असंवैधानिक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधानसभा के भीतर की रिकॉर्डिंग सदन की विशेष आपत्ति होती है। अध्यक्ष की अनुमति के बिना बाहरी पुलिस बल स्वत: संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस ने विधानसभा की कार्यवाही को डॉक्टर्ड बताया और उस पर कानूनी कार्रवाई करना सीधे तौर पर सदन की गरिमा और विशेषाधिकार पर हमला है। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने पंजाब पुलिस के तीन अधिकारियों से 48 घंटे के भीतर इस पर स्पष्टीकरण मांगा था। अब दोबारा से इन अधिकारियों को पत्र लिखकर 15 जनवरी तक पक्ष रखने को कहा है।