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जिया परिवार की चौथी पीढ़ी की इस वारिस ने लंदन से लौटने के बाद रिक्शे पर बैठकर अपने पिता के लिए प्रचार किया, जिसने जनता का ध्यान खींचा।

नई दिल्ली : बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव के नतीजों ने जहा तारिक रहमान के लिए सत्ता का रास्ता साफ कर दिया है, वहीं उनके साथ एक नया चेहरा "भविष्य की नेता" के रूप में उभरकर सामने आया है। वह चेहरा है बैरिस्टर जाइमा रहमान का। बीएनपी (BNP) प्रमुख तारिक रहमान की इकलौती बेटी जाइमा ने इस चुनाव प्रचार के दौरान जिस सादगी और सक्रियता का परिचय दिया, उसने उन्हें बांग्लादेश के युवाओं और महिलाओं की नई पसंद बना दिया है।

लंदन से कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्वदेश लौटीं जाइमा अब 'जिया परिवार' की उस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए तैयार दिख रही हैं, जिसे कभी उनकी दादी खालिदा जिया ने संभाला था।

​कौन हैं जाइमा रहमान? बैरिस्टर से राजनेता तक का सफर

​26 अक्टूबर 1995 को ढाका में जन्मी जाइमा रहमान, बांग्लादेश के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक परिवारों में से एक 'जिया परिवार' की चौथी पीढ़ी हैं। उनके दादा जियाउर रहमान पूर्व राष्ट्रपति थे और दादी खालिदा जिया देश की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं।

जाइमा ने लंदन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली और 2019 में लिंकन्स इन से बैरिस्टर बनीं। करीब 17 साल तक अपने पिता के साथ निर्वासन में रहने के बाद, वह दिसंबर 2025 में बांग्लादेश लौटीं। उनकी वापसी के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि वे राजनीति में कदम रखेंगी, जिसकी झलक इस चुनाव में साफ दिखाई दी।

​चुनाव प्रचार का अनोखा अंदाज: रिक्शे पर जनसंपर्क

​जाइमा रहमान इस चुनाव में अपनी खास प्रचार शैली के कारण सुर्खियों में रहीं। उन्होंने अपने पिता के निर्वाचन क्षेत्र ढाका-17 में किसी बड़ी रैली के बजाय जमीनी स्तर पर जुड़ने को प्राथमिकता दी। जाइमा को ढाका की सड़कों पर आम लोगों की तरह रिक्शे पर बैठकर प्रचार करते देखा गया।

उन्होंने 'धान की बाली' बीएनपी का चुनाव चिन्ह के पर्चे बांटे और दुकानदारों, पैदल यात्रियों और रिक्शा चालकों से सीधे संवाद किया। उनकी इस सादगी ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया और उन्हें एक 'कनेक्टेड लीडर' के रूप में स्थापित किया।

​युवाओं और महिलाओं के बीच बढ़ती लोकप्रियता

​जाइमा रहमान को बांग्लादेश के 'Gen Z' के बीच एक आइकन के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने अपने भाषणों और सोशल मीडिया संदेशों में लैंगिक समानता, युवाओं के लिए रोजगार और डिजिटल बांग्लादेश के विजन पर जोर दिया है।

उनका मानना है कि महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक रूप से नहीं, बल्कि नीति-निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उनकी पढ़ी-लिखी और आधुनिक छवि बीएनपी को एक नई और उदारवादी पहचान दे रही है, जो पार्टी को कट्टरपंथ के आरोपों से दूर रखने में मददगार साबित हो सकती है।

​अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पिता का प्रतिनिधित्व

​राजनीति में आने से पहले ही जाइमा ने अपनी कूटनीतिक क्षमता का परिचय दे दिया था। उन्होंने वॉशिंगटन डी.सी. में आयोजित 'नेशनल प्रेयर ब्रेकफास्ट' जैसे हाई-प्रोफाइल कार्यक्रमों में अपने पिता तारिक रहमान का प्रतिनिधित्व किया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी इस सक्रियता को उनके "पॉलिटिकल लॉन्च" के रूप में देखा गया। जानकारों का मानना है कि तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद जाइमा पार्टी के भीतर एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक पद संभाल सकती हैं, जिससे वे भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार हो सकें।

​विरासत बनाम चुनौती: क्या बनेंगी अगली पीएम?

​हालांकि जाइमा ने अभी तक किसी आधिकारिक पद या चुनाव लड़ने की घोषणा नहीं की है, लेकिन बांग्लादेश के राजनीतिक गलियारों में उन्हें "अगली आवाज" माना जा रहा है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती जिया परिवार की विरासत को भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त रखना और देश की जटिल राजनीति में खुद को एक स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित करना होगा। अवामी लीग के बाद अब बांग्लादेश एक नए नेतृत्व की तलाश में है, और जाइमा रहमान उस खाली जगह को भरने के लिए सबसे प्रबल दावेदार नजर आ रही हैं।

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