एपी सिंह, ढाका। बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच जमात-ए-इस्लामी के अमीर (चीफ) शफीकुर रहमान ने कूटनीतिक संकेत देते हुए कई अहम मुद्दों पर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया। मतदान से पहले उन्होंने ढाका के एक प्रतिष्ठित होटल में विदेशी राजनयिकों, अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ बातचीत किया। इस पहल को चुनाव से पहले भरोसा कायम करने और सकारात्मक छवि पेश करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर पूछे गए सवाल के जवाब में रहमान ने प्रतीकात्मक भाषा का इस्तेमाल किया।
उन्होंने सभागार में लगे झूमरों की ओर इशारा करते हुए संबंधों को रंगीन बताया। जब ध्यान दिलाया गया कि झूमरों का रंग हरा है, तो उन्होंने कहा कि हरा रंग तरक्की और विकास का प्रतीक है। उनका कहना था कि भारत पड़ोसी देश है, इसलिए उसके साथ सहयोग और मजबूत रिश्ते उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे। इस बयान को क्षेत्रीय संतुलन और व्यावहारिक कूटनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। देश में धार्मिक और सामाजिक विविधता के सवाल पर उन्होंने अल्पसंख्यक शब्द से असहमति जताई। उनका कहना था कि बांग्लादेश में सभी नागरिक बराबर हैं और किसी को दूसरे दर्जे का नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि हर व्यक्ति सबसे पहले बांग्लादेशी है और समान अधिकारों का हकदार है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब चुनावी दौर में कुछ समुदायों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंताएं जताई हैं। महिलाओं की भूमिका और इस्लामी मूल्यों के पालन पर उठे सवालों का जवाब देते हुए रहमान ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिलाओं के खिलाफ नहीं है। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि उनके अपने परिवार में पत्नी और बेटियां हैं, इसलिए महिला-विरोधी होने का सवाल ही नहीं उठता। इन बयानों से साफ है कि जमात-ए-इस्लामी चुनाव से पहले खुद को एक जिम्मेदार और संतुलित राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है, ताकि देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों में भरोसा कायम किया जा सके।











