US Deadly Mission: ईरान के ऊबड़-खाबड़ और बर्फीले पहाड़ों के बीच पिछले 48 घंटों से एक ऐसा खेल चल रहा था, जिसका अंत अमेरिका की एक बड़ी कूटनीतिक और सैन्य जीत के रूप में हुआ। F-15E लड़ाकू विमान के क्रैश होने के बाद पायलट ने पैराशूट के जरिए सुरक्षित लैंडिंग तो कर ली थी, लेकिन वह सीधे दुश्मन की सीमा के भीतर था।
चारों ओर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और स्थानीय सशस्त्र जवान उसे ढूंढने के लिए इनाम के लालच में घूम रहे थे। ऐसे में अमेरिकी विशेष बलों ने एक ऐसा 'डेडली' मिशन शुरू किया, जिसने दुनिया को अपनी ताकत का लोहा मनवा दिया।
पिस्टल, बीकन और मौत का सामना: पायलट की सर्वाइवल
ईरान के कोहगिलुयेह प्रांत के घने जंगलों में उतरे पायलट के पास रक्षा के लिए केवल एक सर्विस पिस्टल और अपनी लोकेशन भेजने के लिए एक इमरजेंसी बीकन था। वह लगातार अपनी स्थिति बदल रहा था ताकि ईरानी रडार और जमीन पर खोज रहे कबीले उसे पकड़ न सकें।
कड़ाके की ठंड और भूख के बीच, उसने अपनी पिस्टल के दम पर कई बार पास आए खतरों का सामना किया। अंततः, उसके बीकन से मिले गुप्त सिग्नल को अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने डिकोड किया और रेस्क्यू टीम को सटीक लोकेशन भेजी।
अमेरिकी कमांडोज का हमला: भारी गोलीबारी के बीच रेस्क्यू
जैसे ही लोकेशन कन्फर्म हुई, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हरी झंडी मिलते ही 'नाइट हॉक' हेलीकॉप्टरों और 'सील्स' के दस्ते ने ईरानी सीमा में प्रवेश किया। वहां पहले से ही मौजूद ईरानी टुकड़ियों और अमेरिकी कमांडोज के बीच भीषण मुठभेड़ हुई।
भारी गोलीबारी के बीच, कमांडोज ने एक सुरक्षा घेरा बनाया और 'फास्ट रोप' के जरिए पायलट को ऊपर खींच लिया। तेहरान की सेना जब तक भारी बैकअप बुलाती, तब तक अमेरिकी दस्ता सीमा पार कर सुरक्षित क्षेत्र में पहुंच चुका था।
ईरानी दावों की हवा निकली: ट्रंप का कड़ा संदेश
इस सफल मिशन ने ईरान के उन दावों की हवा निकाल दी है, जिसमें वे पायलट को युद्ध बंदी बनाने और इनाम देने की बात कर रहे थे। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मिशन को "इतिहास का सबसे साहसी रेस्क्यू" करार देते हुए कहा कि अमेरिका अपने किसी भी सैनिक को दुश्मन के भरोसे नहीं छोड़ता।
हालांकि, ईरान अब भी दावा कर रहा है कि उसने विमान को मार गिराया था, लेकिन पायलट के सुरक्षित निकलने ने तेहरान को कूटनीतिक मोर्चे पर बैकफुट पर ला दिया है।










