तेहरान : मिडिल ईस्ट में जारी भीषण महायुद्ध के बीच ईरान ने अपने नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर फैल रही अंतरराष्ट्रीय अफवाहों पर पूर्ण विराम लगाने की कोशिश की है। युद्ध के 16वें दिन ईरानी विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि मुजतबा खामेनेई पूरी तरह स्वस्थ हैं और वे सामान्य रूप से अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की सुरक्षा को लेकर अन्य देशों को अपनी जिम्मेदारी याद दिलाई है।
मुजतबा खामेनेई की सेहत: कोमा और पैर कटने के दावों को ईरान ने नकारा
पिछले कुछ दिनों से ब्रिटिश मीडिया 'द सन' और अन्य पश्चिमी सूत्रों द्वारा यह दावा किया जा रहा था कि 28 फरवरी के अमेरिकी-इजरायली हमलों में मुजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हो गए थे। रिपोर्टों में यहाँ तक कहा गया था कि वे कोमा में हैं और उनका एक पैर काटना पड़ा है।
हालांकि, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें 'दुष्प्रचार' करार दिया है। ईरान का कहना है कि नेतृत्व पूरी तरह सुरक्षित है और देश की रक्षा प्रणाली मजबूती से काम कर रही है।
ट्रम्प की नई रणनीति: 'होर्मुज की सुरक्षा केवल अमेरिका का ठेका नहीं'
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से तेल आयात करने वाले अन्य देशों को भी इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा का भार उठाना चाहिए। ट्रम्प के अनुसार, अमेरिका अकेले इस रणनीतिक रास्ते को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी नहीं लेगा, बल्कि जिन देशों की ऊर्जा आपूर्ति इस रास्ते पर निर्भर है, उन्हें भी सैन्य और वित्तीय सहयोग देना होगा।
भारत के लिए राहत: 92,700 टन LPG लेकर भारत आ रहे दो जहाज
युद्ध के बीच भारत की कूटनीति का बड़ा असर देखने को मिला है। ईरान द्वारा दी गई विशेष अनुमति के बाद 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' नाम के दो भारतीय LPG कैरियर सुरक्षित रूप से होर्मुज स्टेट पार कर चुके हैं।
शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा के अनुसार, ये जहाज कुल 92,700 टन LPG लेकर गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाह की ओर बढ़ रहे हैं। ये उन 24 जहाजों का हिस्सा थे जो युद्ध शुरू होने के बाद क्षेत्र में फंस गए थे। अगले 2-3 दिनों में इनके भारत पहुँचने की संभावना है, जिससे घरेलू गैस आपूर्ति में बड़ी राहत मिलेगी।
IRGC ने इराक और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को दहलाया
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया है कि उसने इराक और कुवैत में स्थित तीन प्रमुख अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोनों से सटीक हमले किए हैं।
निशाना बनाए गए ठिकानों में इराक के एरबिल स्थित हरिर एयरबेस, और कुवैत में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी वाले अली अल-सलेम व अरिफ़जान बेस शामिल हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वे केवल सैन्य ठिकानों को ही निशाना बना रहे हैं।
अमेरिका पर 'फॉल-फ्लैग' हमले का आरोप: 'शाहिद' ड्रोन की कॉपी का मुद्दा
ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर एक नया और गंभीर आरोप लगाया है। ईरानी सेना के अनुसार, दुश्मन देश ईरान के मशहूर 'शाहिद-136' ड्रोन की हूबहू कॉपी बनाकर नागरिक ठिकानों पर हमले कर रहे हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान को बदनाम किया जा सके। ईरान ने इन नकली ड्रोनों को "लूकस" नाम दिया है।
तेहरान का दावा है कि तुर्किये, कुवैत और इराक में हाल ही में हुए कुछ हमलों को इसी 'फॉल्स-फ्लैग' ऑपरेशन के तहत अंजाम दिया गया ताकि क्षेत्र में ईरान के खिलाफ माहौल बनाया जा सके।








