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लेबनान ने इजरायल के साथ शांति वार्ता के दरवाजे खोलने के संकेत दिए हैं, लेकिन इसके लिए 'पहले युद्धविराम' की अनिवार्य शर्त रखी है।

बेरूत : पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत सामने आया है। लेबनान ने इजरायल के साथ सीधे शांति वार्ता करने की इच्छा जताई है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, लेबनान सरकार ने संकेत दिया है कि वह दशकों से चले आ रहे विवाद को सुलझाने और जंग रोकने के लिए बातचीत की मेज पर आने को तैयार है।

हालांकि, लेबनान ने इसके लिए एक अनिवार्य शर्त रखी है कि किसी भी प्रकार की शांति चर्चा शुरू होने से पहले क्षेत्र में पूर्ण युद्धविराम लागू होना चाहिए।

​युद्धविराम की शर्त और लेबनानी नेतृत्व का रुख

​लेबनान के संसदीय अध्यक्ष और अमल मूवमेंट के नेता नबीह बेरी ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना युद्धविराम के कोई भी वार्ता संभव नहीं है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब इजरायल, लेबनान में साल 2006 के युद्ध के बाद के सबसे बड़े जमीनी अभियान की चेतावनी दे रहा है।

लेबनान का मानना है कि जब तक इजरायली हमले जारी रहेंगे, कूटनीतिक बातचीत का कोई ठोस आधार नहीं बन सकता। उधर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने साफ कर दिया है कि उनके बल ईरानी समर्थित सैन्य क्षमताओं के खिलाफ अभियान जारी रखे हुए हैं।

​कूटनीतिक प्रयास: जेरेड कुशनर और पेरिस वार्ता की संभावना

​शांति बहाली की कोशिशों में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ भी सक्रिय हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने करीबी सलाहकार रॉन डर्मर को लेबनान से जुड़े कूटनीतिक प्रयासों के लिए नियुक्त किया है।

वहीं, अमेरिकी पक्ष से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर के भी इन वार्ताओं में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में पेरिस या साइप्रस में एक उच्च स्तरीय बैठक हो सकती है, जहाँ शांति के रोडमैप पर चर्चा होगी।

​फ्रांस का शांति प्रस्ताव और हिजबुल्लाह का मुद्दा

​इस बीच फ्रांस की ओर से भी एक गुप्त शांति प्रस्ताव की चर्चा जोरों पर है। इस कथित प्रस्ताव में युद्ध खत्म करने के लिए हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण और लेबनान द्वारा इजरायल को आधिकारिक मान्यता देने जैसी कड़ी शर्तें शामिल होने की बात कही गई है।

हालांकि, फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर ऐसे किसी भी प्रस्ताव के अस्तित्व से इनकार किया है। लेबनान के भीतर हिजबुल्लाह के प्रभाव को देखते हुए इन शर्तों पर सहमति बनाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

​सीमा पर भीषण जंग: हिजबुल्लाह और इजरायली सेना के बीच झड़पें

​एक तरफ जहाँ बातचीत की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत काफी खौफनाक है। इजरायली सेना ने लेबनानी सीमा के पास स्थित ऐता अल-शाब शहर की ओर बढ़ने की कोशिश की है, जहाँ भारी गोलीबारी जारी है। जवाबी कार्रवाई में हिजबुल्लाह के लड़ाकों ने अल-खज्जान हिल क्षेत्र में इजरायली सैनिकों के जमावड़े को निशाना बनाते हुए रॉकेट और मिसाइलें दागी हैं।

अल जजीरा के अनुसार, इजरायली हवाई हमलों और तोपखाने की गोलाबारी ने मजदल जवतर और अहर्नौन जैसे कई लेबनानी कस्बों को निशाना बनाया है।

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