नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में पिछले 15 दिनों से जारी भीषण संघर्ष के थमने के फिलहाल कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के नेतृत्व ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा की जा रही सीजफायर की अपीलों को सिरे से खारिज कर दिया है।
ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि वे अभी ईरान के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत या समझौते के पक्ष में नहीं हैं, जबकि ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रखने की कसम खाई है। इस अड़ियल रुख ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
डोनाल्ड ट्रम्प का कड़ा संदेश: 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' तक जारी रहेगी जंग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि ईरान के खिलाफ शुरू किया गया 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' तब तक नहीं रुकेगा जब तक ईरान अपनी 'आतंकवादी गतिविधियों' को पूरी तरह बंद नहीं कर देता।
ट्रम्प ने कहा कि ईरान को अपनी मिसाइल क्षमता और परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करना होगा। उन्होंने कतर और अन्य मध्यस्थ देशों को संकेत दिया है कि अमेरिका फिलहाल किसी भी टेबल टॉक में रुचि नहीं रखता है। ट्रम्प के इस आक्रामक रुख ने उन कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा झटका दिया है जो युद्ध को फैलने से रोकने में जुटी थीं।
ईरान की जवाबी हुंकार: 'अमेरिका को मिडिल ईस्ट से खदेड़ कर दम लेंगे'
ईरान की ओर से भी सीजफायर के प्रस्तावों पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ईरान के नए नेतृत्व और IRGC ने साफ कर दिया है कि वे अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों का 'ऐतिहासिक बदला' लेंगे।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि जब तक अमेरिकी सेना इस क्षेत्र को खाली नहीं कर देती, उनका संघर्ष जारी रहेगा। ईरान ने अपनी 'मोजैक डिफेंस' रणनीति के तहत स्वतंत्र प्रांतीय कमानों को सक्रिय कर दिया है, जिससे वे केंद्रीय नेतृत्व पर हमले के बावजूद लंबी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ती चिंता और वैश्विक प्रभाव
फ्रांस, जर्मनी और संयुक्त राष्ट्र लगातार दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं, लेकिन उसका कोई असर होता नहीं दिख रहा। युद्ध लंबा खिंचने के कारण वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है।
भारत जैसे देशों को तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक संघर्ष करना पड़ रहा है। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में व्यापारिक जहाजों का ट्रैफिक रुकने से आने वाले दिनों में महंगाई का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।









