मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान का खार्ग आइलैंड (Kharg Island) फिर से वैश्विक चर्चा के केंद्र में आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयानों और हमलों की चेतावनी के बाद यह छोटा सा द्वीप युद्ध के सबसे संवेदनशील मोर्चों में शामिल हो गया है।
फारस की खाड़ी में स्थित यह द्वीप ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, जहां से देश के कुल कच्चे तेल का करीब 80–90 प्रतिशत निर्यात होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस द्वीप के तेल टर्मिनलों को नुकसान पहुंचता है, तो वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है और दुनिया भर की ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
खार्ग आइलैंड की भौगोलिक स्थिति और सामरिक अहमियत
फारस की खाड़ी में ईरानी तट से लगभग 33 किलोमीटर दूर स्थित यह द्वीप सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान पर है। महज 20 वर्ग किलोमीटर के इस छोटे से द्वीप पर ईरान के सबसे बड़े तेल टर्मिनल और स्टोरेज टैंक स्थित हैं। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे 'पर्शियन गल्फ' के व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण रखने में सक्षम बनाती है।
Last night, U.S. forces executed a large-scale precision strike on Kharg Island, Iran. The strike destroyed naval mine storage facilities, missile storage bunkers, and multiple other military sites. U.S. forces successfully struck more than 90 Iranian military targets on Kharg… pic.twitter.com/2X1glD4Flt
— U.S. Central Command (@CENTCOM) March 14, 2026
ईरान का 90% तेल निर्यात का केंद्र
खार्ग आइलैंड ईरान के कच्चे तेल के निर्यात का मुख्य द्वार है। ईरान के कुल कच्चे तेल का लगभग 80 से 90 प्रतिशत एक्सपोर्ट अकेले इसी द्वीप के माध्यम से होता है। यहाँ से प्रतिदिन करीब 70 लाख बैरल तेल विशाल टैंकरों में लादा जा सकता है। ईरान की राष्ट्रीय आय का एक बड़ा हिस्सा इसी निर्यात से आता है, जो चीन सहित दुनिया के कई अन्य बड़े देशों को भेजा जाता है।
डोनाल्ड ट्रम्प का दावा और सैन्य ठिकानों पर प्रहार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में दावा किया है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने खार्ग आइलैंड पर मौजूद ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर उन्हें भारी नुकसान पहुँचाया है। ट्रम्प ने इस हमले का वीडियो भी साझा किया है, जिसमें द्वीप पर धुएं के गुबार देखे जा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 'शालीनता' दिखाते हुए अभी केवल सैन्य ढांचों को नष्ट किया गया है और तेल रिफाइनरियों या पाइपलाइनों को फिलहाल छोड़ दिया गया है।
तेल बुनियादी ढांचे पर हमले की चेतावनी और वैश्विक संकट
ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बाधा डाली, तो अगला निशाना ईरान का पूरा ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खार्ग आइलैंड के तेल टर्मिनलों को क्षति पहुँचती है, तो वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार मच जाएगा। इससे न केवल तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, बल्कि दुनिया भर की सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित होगी।

इतिहास के पन्नों में खार्ग आइलैंड और युद्ध का प्रभाव
यह पहली बार नहीं है जब यह द्वीप किसी युद्ध का निशाना बना हो। 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी इराक ने इस द्वीप पर अनगिनत हवाई हमले किए थे ताकि ईरान की अर्थव्यवस्था को तोड़ा जा सके। उस समय अमेरिकी प्रशासन ने जहाजों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी थी, लेकिन मौजूदा हालात में अमेरिका सीधे तौर पर इन ठिकानों को निशाना बनाने की बात कर रहा है, जो क्षेत्र में बढ़ते तनाव के गंभीर संकेत हैं।










