रायपुर। आपात स्थिति में मरीजों की मदद करने वाली 108 सेवा से पीडियाट्रिक इमरजेंसी में भी मदद मिलेगी। एक अप्रैल से तीन सौ नई एंबुलेंस राज्य में सहायता के लिए दौड़ेगी। आवश्यकताओं को देखते हुए एडवांस लाइफ सपोर्ट वाले सिस्टम की संख्या बढ़ाकर 70 की जाएगी। दावा किया जा रहा है कि कॉल ट्रेकर सिस्टम से लैस इन एंबुलेंस से रिस्पांस टाइम को भी कम करने में मदद मिलेगी। लंबी प्रक्रिया और तीन बार की कोशिशों के बाद सीजीएमएससी ने सिंगल टेंडर के माध्यम से 108 संजीवनी सेवा के संचालन के लिए नई एजेंसी तय की गई है। उसके साथ अनुबंध हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी करने के बाद एक अप्रैल से इस एबुंलेस सेवा संचालन नई कंपनी के माध्यम से किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, नए टेंडर में सुविधा में बढ़ोतरी के दावे किए जा रहे है। नई एजेंसी को तीन सौ नई एंबुलेंस लाना है, जिससे हर जिले में नई गाड़ी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा इस योजना में 10 ऐसी एंबुलेंस को शामिल किए जाने का दावा किया जा रहा है जो पीडियाट्रिक यानी शिशु रोग की आपात सुविधाओं से लैस होगी। इनकी तैनाती जरूरत और इमरजेंसी को ध्यान में रखते हुए की जाएगी। साथ होने वाली लगातार घटनाओं को ध्यान में रखते हुए एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम वाले एंबुलेंस की संख्या में 60 से बढ़ाकर 70 की जाएगी। एएलएस सिस्टम वाली एंबुलेंस में ऑक्सीजन सहित अन्य तरह के लाइफ सपोर्ट सिस्टम लगे होते हैं। इन एएलएस सिस्टम वाले एंबुलेंस की आवश्यकता होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों के साथ व्हीआईपी कार्यक्रम के दौरान भी पड़ती है । इसके अलावा अनुबंधित कंपनी को एंबुलेंस में कॉल ट्रेकर सिस्टम लगाने पर जोर दिया गया है। इसके माध्यम से मदद मांगने वाले का लोकेशन ट्रेस होगा और एंबुलेंस सही समय पर जरूरतमंद तक पहुंच सकेगी।
एमएमयू, डाक्टर नहीं तो संचालन नहीं
सुदूर इलाकों में रहने वालों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए पीएम जनमन योजना के तहत मोबाइल मेडिकल यूनिट का संचालन किया जा रहा है। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक एमएमयू में जरूरी दवाओं के साथ एमबीबीएस डाक्टर की तैनाती जरूरी है। जिस यूनिट में डॉक्टर की नियुक्ति नहीं की गई है उसका संचालन नहीं किए जाने के निर्देश दिए गए है। के माध्यम से अमी एमएमयू के विभिन्न क्षेत्रों में ढाई सौ ज्यादा शिविर लगाए गए हैं।
गर्भवती महिलाओं का केवल परिवहन
गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचाने के लिए 102 महतारी एक्सप्रेस का संचालन किया जा रहा है। पूर्व में संचालित वाहनों में आपात स्थिति के लिए इसमें पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती होती थी। इसके नए टेंडर के बाद भी 102 महतारी एक्सप्रेस का उपयोग केवल गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। पैरामेडिकल स्टाफ के अभाव में कई बार जरूरत के दौरान मरीज को दिक्कत भी सामने आ जाती है।










