मथुरा: उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित कृष्ण कृपा धाम में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पश्चिम एशिया मे जारी युद्ध और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।
'श्री कृष्ण कृपा विद्यासन' और 'ध्यान केंद्र' के उद्घाटन के अवसर पर उन्होंने वैश्विक नेताओं और समाज को चेतावनी दी कि भौतिकवाद और सत्ता की अंधी दौड़ ने दुनिया को विनाश की कगार पर ला खड़ा किया है।
भागवत ने कहा कि यदि समय रहते मानवता को आध्यात्मिक मार्ग पर नहीं लाया गया, तो इस युद्ध का खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा।
पश्चिम एशिया युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति को बड़ा खतरा
सरसंघचालक ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष केवल दो देशों का नहीं, बल्कि वैश्विक अशांति का कारण बन रहा है। इस युद्ध से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।
भागवत ने चेतावनी दी कि यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो यह तीसरे विश्व युद्ध की आहट साबित हो सकता है, जिससे अमीर हो या गरीब, हर देश और हर नागरिक प्रभावित होगा। उन्होंने विनाशकारी हथियारों की होड़ और 'सुपरपावर' बनने की अंधी दौड़ को मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया।
भारत की 'सनातन' परंपरा में ही है विश्व शांति का समाधान
सरसंघचालक ने पश्चिम के भौतिकवादी दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए कहा कि केवल आर्थिक और सैनिक शक्ति से दुनिया में शांति स्थापित नहीं की जा सकती। उन्होंने भारत की सनातन परंपरा और आध्यात्मिक ज्ञान को विश्व शांति का एकमात्र टिकाऊ समाधान बताया।
मोहन भागवत ने कहा कि भारत की संस्कृति 'पूरी दुनिया एक परिवार है' (वसुधैव कुटुंबकम्) के सिद्धांत पर चलती है। उन्होंने कहा वृंदावन जैसे आध्यात्मिक केंद्र केवल पूजा-पाठ की जगह नहीं हैं, बल्कि ये मानवता को सही दिशा दिखाने और मन की शांति प्रदान करने के ऊर्जा स्रोत हैं।
Delhi: RSS Chief Mohan Bhagwat says, "The time has come for the resurgence of Sanatan Dharma, and therefore, the progress of Hindustan is inevitable. In reality, when something is to be built to shape human character, it takes time. We can expect the development of our society… pic.twitter.com/UIXLmWo5cr
— IANS (@ians_india) March 23, 2026
भौतिकवाद से विनाश: प्रकृति और मानवता का संतुलन अनिवार्य
मोहन भागवत ने मनुष्य और प्रकृति के बीच बढ़ते असंतुलन पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भौतिक सुखों की अंधी चाहत में मनुष्य प्रकृति का दोहन कर रहा है, जिससे जलवायु परिवर्तन और महामारियों जैसी आपदाएं बढ़ रही हैं।
'ध्यान केंद्र' की महत्ता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य अपने अंतर्मन को शांत नहीं करेगा, तब तक बाहरी दुनिया में शांति स्थापित नहीं हो सकती। उन्होंने समाज से अपील की कि वे भौतिक साधनों का उपयोग तो करें, लेकिन आध्यात्मिक मूल्यों को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
वृंदावन में आध्यात्मिक और शैक्षिक केंद्र का भव्य उद्घाटन
कार्यक्रम के दौरान सरसंघचालक ने महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज के सानिध्य में 'श्री कृष्ण कृपा विद्यासन' और 'ध्यान केंद्र' का उद्घाटन किया। यह केंद्र न केवल वैदिक ज्ञान और आध्यात्मिक शिक्षा का हब बनेगा, बल्कि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान और योग के जरिए मानसिक शांति प्राप्त करने की सुविधा भी मिलेगी।










