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उत्तर प्रदेश के शामली जिले का पाकिस्तान से जुड़ाव 90 के दशक से ही रहा है। सुरक्षा एजेंसियों ने जासूसी और देश विरोधी गतिविधियों के आरोप में अब तक जिले से 15 से अधिक संदिग्धों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है।

शामली: उत्तर प्रदेश का शामली जिला पिछले तीन दशकों से देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि 90 के दशक से ही इस जिले के तार पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) से जुड़ते रहे हैं।

जासूसी से लेकर हथियारों की तस्करी और आतंकी नेटवर्क के संचालन तक, शामली के अलग-अलग इलाकों से अब तक 15 से अधिक संदिग्धों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जो सीधे तौर पर सीमा पार के आकाओं के संपर्क में थे।

​90 के दशक से शुरू हुआ जासूसी का 'काला अध्याय' 
शामली में पाकिस्तानी नेटवर्क की जड़ें काफी पुरानी हैं। सुरक्षा रिकॉर्ड के अनुसार, जिले में सक्रिय संदिग्धों का इतिहास साल 1990 के आसपास से मिलता है।

शुरुआती दौर में यहाँ से ऐसे लोगों को पकड़ा गया था जो सामरिक महत्व की सूचनाएं और नक्शे पाकिस्तान भेजने का काम करते थे। तब से लेकर आज तक, सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर यहाँ छापेमारी कर बड़े जासूसी रैकेट का भंडाफोड़ करती रही हैं।

​ISI एजेंटों की घुसपैठ और 'स्लीपर सेल' का खतरा 
जांच में यह सामने आया है कि शामली के कुछ विशिष्ट इलाके आईएसआई एजेंटों के लिए 'स्लीपर सेल' के रूप में काम कर रहे थे। गिरफ्तार किए गए कई संदिग्धों के पास से फर्जी पासपोर्ट, प्रतिबंधित सिम कार्ड और पाकिस्तानी नंबरों वाली कॉल डिटेल बरामद हुई है।

ये एजेंट यहाँ सामान्य नागरिकों की तरह रहते थे और पर्दे के पीछे से देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देते थे। इनमें से कुछ संदिग्धों ने तो स्थानीय पहचान पत्र तक बनवा लिए थे, जिससे उनके ऊपर शक करना और भी मुश्किल हो गया था।

​हथियारों की तस्करी और फर्जी दस्तावेज का 'हब' 
​शामली केवल जासूसी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह फर्जी दस्तावेजों और अवैध हथियारों की तस्करी का भी केंद्र बनकर उभरा है। पकड़े गए 15 संदिग्धों में से कई ऐसे थे जो पाकिस्तान से आने वाले निर्देशों पर देश के विभिन्न हिस्सों में फर्जी आईडी सप्लाई करते थे।

इसके अलावा, पश्चिमी यूपी के अपराधियों के जरिए आतंकी नेटवर्क को हथियार मुहैया कराने के लिंक भी शामली से जुड़े पाए गए हैं, जिसने केंद्रीय जांच एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।

​ताजा खुलासे और एटीएस की पैनी नजर

​हाल के वर्षों में डिजिटल जासूसी के बढ़ते मामलों ने सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। यूपी एटीएस (UP ATS) ने शामली के कैराना, कांधला और झिंझाना जैसे इलाकों में विशेष सतर्कता बढ़ा दी है। हाल ही में हुई कुछ गिरफ्तारियों से यह संकेत मिले हैं कि अब सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड एप्स के जरिए सीमा पार से निर्देश दिए जा रहे हैं।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शामली की भौगोलिक स्थिति और कुछ पुराने संपर्कों का फायदा उठाकर पाकिस्तान यहाँ अपनी पैठ बनाए रखने की कोशिश करता है।

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