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दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी कर रहे वाराणसी के अनुराग मिश्रा का गूगल पे ट्रांजैक्शन फेल होने पर पता चला कि उनके ICICI बैंक खाते में 25.59 करोड़ रुपये का 'नेगेटिव बैलेंस' है।

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के वाराणसी के रहने वाले और दिल्ली में रहकर UPSC की तैयारी कर रहे अनुराग मिश्रा एक ऐसे साइबर फ्रॉड का शिकार हुए हैं, जिसने बैंकिंग सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

अनुराग के पैन कार्ड का गलत इस्तेमाल कर जालसाजों ने उनके नाम पर 25.59 करोड़ रुपये का भारी-भरकम लोन ले लिया। इस मामले का खुलासा किसी नोटिस से नहीं, बल्कि एक सामान्य डिजिटल पेमेंट फेल होने के बाद हुआ।

​3,500 रुपये की फीस भरने के दौरान हुआ खुलासा

​घटना की शुरुआत 17 जनवरी को हुई, जब अनुराग अपनी लाइब्रेरी की 3,500 रुपये की मासिक फीस जमा करने के लिए गूगल पे का उपयोग कर रहे थे। अचानक उनका ट्रांजैक्शन फेल हो गया। उन्हें लगा कि शायद खाते में पैसे कम होंगे, लेकिन जब उन्होंने अपना ICICI बैंक खाता चेक किया, तो उनके होश उड़ गए।

​खाते में 'नेगेटिव लियन' (Negative Lien)

​अनुराग के बैंक खाते में कोई सामान्य बैलेंस नहीं, बल्कि -25.59 करोड़ रुपये  नेगेटिव लियन दिखाई दे रहा था। बैंक की भाषा में 'लियन' का अर्थ होता है कि बैंक ने उस राशि को फ्रीज या लॉक कर दिया है।

जब अनुराग ने कस्टमर केयर और बैंक शाखा से संपर्क किया, तब उन्हें पता चला कि उनके पैन कार्ड पर करोड़ों का लोन उठाया गया है और भुगतान न होने की स्थिति में उनके खाते को इतनी बड़ी राशि से 'नेगेटिव' कर दिया गया है।

फर्जी कंपनी बनाकर लिया गया लोन

​प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने अनुराग के पैन कार्ड का दुरुपयोग कर वाराणसी में एक करंट अकाउंट खुलवाया था। इसी खाते के जरिए एक फर्जी फर्म को GST में रजिस्टर किया गया और करोड़ों रुपये के लोन लिए गए। अनुराग का कहना है कि उनका इस कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है और न ही उन्होंने कभी वाराणसी में कोई करंट अकाउंट खुलवाने के लिए आवेदन किया था।

पुलिस और साइबर सेल की कार्रवाई

​इस मामले में साइबर क्राइम सेल ने कमलेश कुमार मिश्रा की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया है। साइबर सेल के प्रभारी गोपालजी कुशवाहा के अनुसार, मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। पुलिस को बैंक स्तर पर भी मिलीभगत का संदेह है, क्योंकि बिना उचित वेरिफिकेशन के इतना बड़ा लोन और खाता कैसे खुल गया, यह एक बड़ा सवाल है।

​पुलिस अब उन जालसाजों की तलाश कर रही है जिन्होंने एक साधारण छात्र के दस्तावेजों का उपयोग कर इतनी बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया।

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