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नोएडा के JP Wish Town में मेंटेनेंस शुल्क 94% बढ़ाने पर विवाद बढ़ गया है। रेजिडेंट्स ने योगी के नाम पर वसूली का आरोप लगाया, CEO ने जांच के आदेश दिए।

नोएडा के सेक्टर-134 स्थित JP Wish Town कॉसमॉस में मेंटेनेंस शुल्क में अचानक 94% तक बढ़ोतरी से हड़कंप मच गया है। रेजिडेंट्स का आरोप है कि योगी सरकार के नाम पर यह बढ़ोतरी थोपी जा रही है, जबकि इसके पीछे कोई स्पष्ट लिखित आदेश नहीं है। मामला तूल पकड़ने पर नोएडा प्राधिकरण के CEO ने तुरंत संज्ञान लेकर जांच के आदेश दे दिए हैं।

योगी के नाम पर बढ़ोतरी का आरोप
सोसाइटी के निवासियों का कहना है कि जेपी इंफ्रा से जुड़े सुरक्षा मैनेजमेंट ने मेंटेनेंस शुल्क ₹2 प्रति वर्ग फुट से बढ़ाकर ₹3.89 कर दिया है। यह बढ़ोतरी 1 मई 2026 से लागू करने का नोटिस दिया गया है। आरोप है कि इसके पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मजदूरी बढ़ाने का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन इसका कोई लिखित आदेश साझा नहीं किया गया।

निवासियों का विरोध, प्राधिकरण से गुहार
बी-43 क्लस्टर की निवासी सुलेखा, रीता, स्मिता और रीना समेत कई लोगों ने इसे मनमानी बताया। वरिष्ठ पत्रकार शिशिर सोनी और प्रोफेसर डॉ. आरएस राय ने नोएडा प्राधिकरण के CEO डॉ. कृष्णा करुणेश से मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग की।

CEO ने लिया तुरंत एक्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए CEO ने एक वरिष्ठ अधिकारी को जांच और समाधान के निर्देश दिए हैं। रेजिडेंट्स ने इस त्वरित कार्रवाई पर आभार जताया है।

कानूनी उल्लंघन के आरोप

बिना एग्रीमेंट के बढ़ोतरी
निवासियों का कहना है कि बिना किसी वैध मेंटेनेंस एग्रीमेंट के शुल्क बढ़ाना नियमों के खिलाफ है। यह बढ़ोतरी करीब 94.5% है।

RERA और NCLT नियमों का उल्लंघन
यह कदम NCLT के रेजोल्यूशन प्लान (क्लॉज 22.9) और RERA Act की धारा 11(4)(d) व (e) का उल्लंघन बताया जा रहा है।

सेवाएं बंद करने की चेतावनी
रेजिडेंट्स का आरोप है कि बढ़ी हुई फीस न देने पर सेवाएं बंद करने की धमकी दी जा रही है, जो अनुचित व्यापार व्यवहार है।

पारदर्शिता पर सवाल
निवासियों ने कहा कि महज 20 दिनों में प्रस्तावित दर ₹3.63 से बढ़ाकर ₹3.89 कर दी गई, जिससे पूरी प्रक्रिया संदिग्ध लगती है।

भेदभाव का आरोप
बी-43 क्लस्टर के लोगों का कहना है कि उनसे अन्य क्लस्टर्स की तुलना में ज्यादा शुल्क लिया जा रहा है, जबकि यहां अभी भी 21 टावर अधूरे हैं।

निवासियों की मुख्य मांगें

  • मेंटेनेंस बढ़ोतरी पर तुरंत रोक लगे
  • सेवाएं बाधित न करने के निर्देश दिए जाएं
  • संयुक्त ऑडिट के बाद ही शुल्क तय किया जाए
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