मेरठ के सदर बाजार थाना क्षेत्र के तेली मोहल्ले में रहने वाले उदय भानु विश्वास काशी में शिक्षा विभाग के बोर्ड ऑफिस में प्रशासनिक अधिकारी के पद से रिटायर हुए थे।
उनकी पत्नी शर्मिष्ठा ने 2013 में ही सुसाइड कर लिया था, जिसके बाद वे अपनी बेटी प्रियंका विश्वास के साथ रहते थे। प्रियंका एक प्राइवेट स्कूल में कंप्यूटर टीचर थी।
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, प्रियंका को काला पीलिया हो गया था। 1 दिसंबर 2025 को उसकी मौत हो गई। प्रियंका की मौत के बाद उदय भानु सदमे में चले गए और अपनी बेटी से अलग नहीं होना चाहते थे।
उन्होंने किसी को प्रियंका की मौत की खबर नहीं दी और 5 दिनों तक शव के साथ रहे। जब शव सड़ने लगा, तो वे उस पर परफ्यूम छिड़कने लगे। बाद में, वे घर के एक कमरे में कूड़ा भरकर शव को वहीं छोड़कर कुछ समय के लिए देहरादून चले गए।
उदय भानु विश्वास रिश्तेदारों से झूठ बोलते रहे कि प्रियंका देहरादून के अस्पताल में भर्ती है। शुक्रवार शाम जब रिश्तेदार उदय भानु के घर पहुंचे, तो उन्हें घर के पास एक दुकान पर देखा गया।
जब उन्हें पकड़कर घर के अंदर ले जाया गया, तो वहां बदबू का अंबार था। उदय भानु ने खुद कबूला कि प्रियंका की लाश अंदर है। घर के अंदर का नजारा देख पुलिस और रिश्तेदारों की रूह कांप गई—कमरे में परफ्यूम की ढेरों खाली बोतलें पड़ी थीं और बेड पर प्रियंका का शव लगभग कंकाल बन चुका था, सिर्फ पैर का हिस्सा ही बचा था।
रिश्तेदारों का कहना है कि 2013 में पत्नी की आत्महत्या के बाद प्रियंका गहरे सदमे में चली गई थी और वह एकदम शांत रहने लगी थी। उदय भानु भी समाज से कट गए थे और किसी से नहीं मिलते थे।
पुलिस ने उदय भानु को हिरासत में ले लिया है और शव का पंचनामा भरकर पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया है। सीओ कैंट नवीना शुक्ला ने बताया कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है कि मौत स्वाभाविक थी या कुछ और।










