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उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में रविवार की सुबह एक भीषण सड़क हादसा उस वक्त त्रासदी में बदल गया, जब कोयले से लदा एक अनियंत्रित कंटेनर भाऊलपुर चौराहे पर पलट गया।

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में रविवार की सुबह एक दिल दहला देने वाली त्रासदी सामने आई है। छिबरामऊ कोतवाली क्षेत्र के भाऊलपुर चौराहे पर कोयले से लदा एक अनियंत्रित कंटेनर अचानक पलट गया, जिसकी चपेट में आने से कई राहगीर और स्थानीय लोग मलबे के नीचे दब गए।

इस भीषण हादसे में एक 14 साल की मासूम बच्ची और एक 74 वर्षीय बुजुर्ग की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मलबे में दबने के कारण कई लोगों के अंग-भंग हो गए हैं। प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर भारी मशीनों के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं।

​कन्नौज के छिबरामऊ-तालग्राम रोड पर स्थित भाऊलपुर चौराहा रविवार की सुबह हमेशा की तरह चहल-पहल से भरा था, लेकिन तभी कोयले से लदा एक भारी कंटेनर अनियंत्रित होकर पलट गया। कंटेनर के गिरते ही वहां मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

भारी वजन और कोयले के मलबे के नीचे कई लोग और उनकी मोटरसाइकिलें दब गईं। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन कोयले के ढेर और कंटेनर के भारी वजन के कारण लोगों को निकाल पाना नामुमकिन था। देखते ही देखते पूरे इलाके में अफरा-तफरी और मातम का माहौल छा गया।

​इस दर्दनाक हादसे में अब तक दो लोगों के शव बरामद किए गए हैं। मृतकों की शिनाख्त कर ली गई है, जिसमें नगला दुर्गा निवासी राजू बाथम की 14 वर्षीय पुत्री अंकिश और भाऊलपुर निवासी राधेश्याम के पुत्र कन्हैया लाल (74) शामिल हैं।

एक मासूम बच्ची और बुजुर्ग की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवारों में कोहराम मच गया है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर कंटेनर थोड़ा और आगे या पीछे पलटता, तो मृतकों का आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता था। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

​कंटेनर के नीचे दबने के कारण घायलों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। कोयले के मलबे और लोहे के भारी कंटेनर के दबाव के कारण कई लोगों के हाथ-पैर बुरी तरह कुचल गए हैं, जिससे वे अपंग हो गए हैं।

स्थानीय लोगों और बचाव दल ने कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को बाहर निकाला। मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घायलों को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए छिबरामऊ के सौ शैय्या अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की टीम उनका उपचार कर रही है। कुछ की हालत नाजुक देखते हुए उन्हें उच्च केंद्र रेफर करने की तैयारी की जा रही है।

​इस हादसे के बाद स्थानीय निवासियों में भारी वाहनों की तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि इस मार्ग पर भारी वाहन अक्सर अनियंत्रित होकर चलते हैं, जिससे पहले भी छोटे-मोटे हादसे होते रहे हैं।

कोयले की ओवरलोडिंग और कंटेनर की खराब स्थिति भी इस पलटने का एक बड़ा कारण मानी जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसे भीड़भाड़ वाले चौराहों पर भारी वाहनों की गति सीमा तय की जाए और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी किसी बड़ी जनहानि को रोका जा सके।

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