Middle East Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने अब वैश्विक समुद्री व्यापार को एक बड़े आर्थिक संकट में डाल दिया है। ईरान के एक सांसद अलादीन बोरुजेर्दी के अनुसार, ईरान ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz से गुजरने वाले विदेशी व्यावसायिक जहाजों से 20 लाख डॉलर (करीब 16.7 करोड़ रुपये) का 'संप्रभुता शुल्क' वसूलने की बात कही है।
ईरान का तर्क है कि वह इस क्षेत्र में सुरक्षा प्रदान करता है और चल रहे युद्ध की लागत की भरपाई के लिए यह टैक्स जरूरी है।
· Breaking News – : The Strait of Hormuz has become a "toll road": An oil tanker company paid Iran $2 million (in Chinese yuan) in safe passage fees to allow its ship to pass through.pic.twitter.com/JPjd2NFb0V
— IRAN | INSIGHT (@Geminial_al) March 21, 2026
दुनिया की 'तेल जीवन रेखा' पर ईरान का टैक्स और युद्ध की लागत
ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि वह इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को अब 'मुफ्त' इस्तेमाल नहीं करने देगा। ईरानी सांसद ने सरकारी टेलीविजन पर कहा कि चूंकि क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने और युद्ध की स्थितियों का सामना करने में भारी खर्च होता है, इसलिए गुजरने वाले जहाजों को इसका भुगतान करना होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, कई बड़े मालवाहक जहाजों से यह भारी-भरकम राशि पहले ही वसूली जा चुकी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय नौवहन कंपनियों में खौफ का माहौल है।
डोनाल्ड ट्रम्प का 48 घंटे का अल्टीमेटम और सैन्य कार्रवाई की धमकी
ईरान के इस कदम पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि हॉर्मुज के रास्ते को तुरंत और बिना किसी शर्त के नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के सबसे बड़े बिजली संयंत्रों को निशाना बनाकर उन्हें तबाह कर देगा।
ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक व्यापार में इस तरह की 'वसूली' बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी जवाबी हमले और खाड़ी को पूरी तरह बंद करने की धमकी दी है।
भारत और मित्र देशों के लिए अलग नीति
ईरान इस नाकेबंदी को पूरी दुनिया के खिलाफ न दिखाकर चुनिंदा तरीके से लागू कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह सख्त नियम केवल उन देशों और कंपनियों के लिए हैं जो इजरायल या अमेरिका की आक्रामकता का समर्थन कर रहे हैं।
भारत, चीन और रूस जैसे मित्र देशों के जहाजों के लिए ईरान ने 'सुरक्षित गलियारे' की बात कही है। हाल ही में भारत के दो गैस टैंकरों को विशेष अनुमति के बाद सुरक्षित रास्ता दिया गया, जो दर्शाता है कि ईरान कूटनीतिक रूप से अपने सहयोगियों को नाराज नहीं करना चाहता।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर संकट का साया
हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 30% कच्चा तेल गुजरता है। ईरान द्वारा प्रति जहाज 20 लाख डॉलर की मांग और अमेरिका के साथ सैन्य टकराव की आशंका ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है।
कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जाने का खतरा बढ़ गया है, जिससे भारत सहित दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल और परिवहन की लागत बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गतिरोध लंबा खिंचा, तो यह सदी का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट बन सकता है।









