लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के दो दिवसीय लखनऊ प्रवास ने प्रदेश का सियासी पारा अचानक से बढ़ा दिया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ बंद कमरे में हुई मुलाकात के बाद, संघ प्रमुख ने प्रदेश के दोनों उप मुख्यमंत्रियों—केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक—से भी अहम मुलाकात की है। हालांकि इन मुलाकातों को आधिकारिक तौर पर 'शिष्टाचार भेंट' का नाम दिया जा रहा है, लेकिन सत्ता के गलियारों में इसे आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों, संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में बड़े बदलावों की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
सीएम योगी के साथ बंद कमरे में हुआ गहन मंथन
संघ प्रमुख मोहन भागवत अपने दो दिवसीय प्रवास पर राजधानी लखनऊ आए थे। इस दौरान उनकी सबसे महत्वपूर्ण मुलाकात प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हुई। यह मुलाकात पूरी तरह से एकांत और बंद कमरे में संपन्न हुई, जिससे इसके राजनीतिक मायने और भी गहरे हो जाते हैं।
मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में जिस तरह के बदलाव और समीकरण बन-बिगड़ रहे हैं, उसे देखते हुए सीएम और संघ प्रमुख की इस वार्ता को बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ का बार-बार संघ प्रमुख से मिलना इस बात का संकेत है कि सरकार और संगठन के बीच हर छोटे-बड़े मुद्दे पर सीधा और स्पष्ट संवाद कायम किया जा रहा है।
दोनों डिप्टी सीएम के साथ 10-10 मिनट की 'शिष्टाचार भेंट'
मुख्यमंत्री से लंबी चर्चा करने के बाद, संघ प्रमुख ने बृहस्पतिवार की सुबह प्रदेश के दोनों उप मुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक से भी अलग-अलग मुलाकात की। बताया जा रहा है कि यह मुलाकात लगभग 10-10 मिनट तक चली।
इस छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात ने सियासी सरगर्मी को और तेज कर दिया है। दरअसल, यूपी में इन दिनों योगी कैबिनेट के संभावित विस्तार और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश संगठन में बड़े फेरबदल की चर्चाएं जोरों पर हैं।
ऐसे समय में संघ के शीर्ष नेतृत्व का सरकार के तीनों सबसे बड़े चेहरों से मिलना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की कवायद चल रही है, ताकि किसी भी तरह के मतभेद की गुंजाइश न रहे।
'मिशन 2027' का ताना-बाना बुनने में संघ की बड़ी भूमिका
इन तमाम मुलाकातों के पीछे का सबसे बड़ा और अंतिम लक्ष्य अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हैं। सूत्रों का कहना है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत का फोकस इन दिनों पूरी तरह से यूपी पर केंद्रित है और वे किसी न किसी कार्यक्रम के बहाने लगातार प्रदेश का दौरा कर रहे हैं।
संघ प्रमुख जब भी यूपी आते हैं, तो मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात जरूर होती है। इससे यह साफ हो गया है कि 2027 के विधानसभा चुनावों का चुनावी और वैचारिक ताना-बाना बुनने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होने वाली है। चूंकि अगले ही साल प्रदेश में चुनाव होने हैं, इसलिए सत्ता में वापसी की राह आसान करने के लिए सरकार की नीतियों और संघ के एजेंडे को एक ही दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।










