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यूपी में त्योहारों के सीजन के दौरान 4.32 लाख लीटर मिलावटी तेल जब्त किया गया है, जिसकी बाजार कीमत साढ़े 6 करोड़ रुपये है।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग (FSDA) की बड़ी कार्रवाई में खाने के तेल में बड़े पैमाने पर मिलावट का खुलासा हुआ है। होली और रमजान के मद्देनजर चलाए गए विशेष अभियान के दौरान राज्यभर में 38 तेल कंपनियों और फर्मों को गंभीर कमियां पाए जाने पर नोटिस जारी किया गया है। विभाग ने अब तक साढ़े 6 करोड़ रुपये मूल्य का करीब 4 लाख 32 हजार लीटर मिलावटी तेल जब्त किया है।

​सस्ते पाम ऑयल और राइस ब्रान ऑयल की मिलावट

​जांच में पाया गया कि कंपनियां अधिक मुनाफे के लिए सरसों के महंगे तेल में राइस ब्रान ऑयल, पाम ऑयल और अर्गेमोन जैसे सस्ते तेल मिला रही थीं। उन्नाव और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में तेल को असली दिखाने के लिए हानिकारक केमिकल कलर और आर्टिफिशियल फ्लेवर का इस्तेमाल किया जा रहा था। कई जगहों पर नेपाल से लाया गया 80 रुपये प्रति लीटर वाला सस्ता पाम ऑयल मिलाकर उसे 160 रुपये प्रति लीटर वाले शुद्ध सरसों तेल के नाम पर बेचा जा रहा था।

​एक्सपायर्ड तेल पर नया लेबल लगाकर बेचने का खेल

​गोरखपुर के सहजनवा क्षेत्र में एक कारखाने पर छापेमारी के दौरान 24 लाख रुपये का तेल पकड़ा गया, जिसमें 10 लाख रुपये मूल्य का एक्सपायर्ड सरसों तेल शामिल था। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पुराने तेल की बोतलों से पुरानी तारीखें हटाकर उन पर 2026 तक की नई एक्सपायरी डेट के स्टिकर चिपकाए जा रहे थे। FSDA की टीम ने 66 यूनिट्स की जांच की, जिनमें से 8 को तुरंत बंद करा दिया गया और कुल 231 नमूने लैब टेस्टिंग के लिए भेजे गए हैं।

​सेहत के लिए बेहद खतरनाक है मिलावटी तेल

​वरिष्ठ सर्जन डॉ गणेश यादव ने चेतावनी दी है कि मिलावटी तेल का सेवन हार्ट डिजीज, लिवर डैमेज और ड्रॉप्सी जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है। उन्होंने बताया कि सरसों के तेल में पाम या राइस ब्रान ऑयल की मौजूदगी से हृदय की मांसपेशियों में वसा जमा हो जाती है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा काफी बढ़ जाता है। विशेष रूप से अर्गेमोन ऑयल शरीर के अंगों को गंभीर नुकसान पहुँचाता है।

​दोषी कंपनियों के मालिकों पर FIR और लाइसेंस सस्पेंड

​FSDA आयुक्त रोशन जैकब के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई के बाद उन्नाव और मुजफ्फरनगर की कंपनियों के मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। संयुक्त खाद्य आयुक्त हरिशंकर सिंह ने बताया कि जिन 38 फर्मों को नोटिस दिया गया है, यदि उन्होंने समय रहते अपनी गुणवत्ता में सुधार नहीं किया, तो उनके लाइसेंस स्थायी रूप से निलंबित कर दिए जाएंगे। विभाग का यह अभियान प्रदेश के हर जिले में निरंतर जारी है।

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