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लखनऊ में होली के दौरान हुई सड़क दुर्घटनाओं और आपसी विवादों में 8 लोगों की जान चली गई।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में होली का उल्लास उस समय मातम में बदल गया जब शहर के अलग-अलग इलाकों में हुए हादसों और हुड़दंग के कारण 8 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। पिछले 24 घंटों के दौरान शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी में घायलों और मरीजों का तांता लगा रहा। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 800 से अधिक लोग इलाज के लिए अस्पतालों पहुंचे, जिनमें से अधिकांश सड़क हादसों और नशे की हालत में वाहन चलाने के कारण चोटिल हुए थे।

​KGMU ट्रॉमा सेंटर में रही सबसे ज्यादा भीड़

​लखनऊ के केजीएमयू स्थित ट्रॉमा सेंटर में होली के दिन भारी अफरा-तफरी का माहौल रहा। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रेमराज के अनुसार, 24 घंटे के भीतर कुल 248 मरीज इलाज के लिए पहुँचे।

इनमें से 75 से 80 लोग सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हुए थे, जिनमें करीब 40 लोग ऐसे थे जिन्होंने शराब का सेवन कर रखा था। इलाज के दौरान यहाँ 2 गंभीर मरीजों की मृत्यु हो गई, जबकि 6 लोगों को अस्पताल पहुँचने से पहले ही मृत घोषित कर दिया गया था।

​लोकबंधु और बलरामपुर अस्पताल के आंकड़े

​लोकबंधु राजनारायण अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी ने बताया कि उनकी इमरजेंसी में 487 मरीज आए, जिनमें से 60 लोग सड़क हादसों में घायल हुए थे। इनमें से 37 गंभीर मरीजों को भर्ती करना पड़ा।

वहीं, बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी ओपीडी में 365 मरीज पहुँचे, जिनमें से 51 को भर्ती किया गया और 21 घायलों को टांके लगाने की जरूरत पड़ी। बलरामपुर में 73 लोग कुत्ते के काटने की समस्या लेकर भी पहुँचे।

​लोहिया संस्थान और PGI में भी पहुंचे घायल

​डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की इमरजेंसी ओपीडी में 246 मरीज पहुँचे। संस्थान के आंकड़ों के मुताबिक, करीब 52 मरीज होली के हुड़दंग का शिकार होकर आए थे। हड्डी रोग विभाग में 27 और सर्जरी विभाग में 75 मरीजों का इलाज किया गया। इसके अलावा, एसजीपीजीआई के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में 74 घायल पहुँचे, जिनमें से 20 से अधिक की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें भर्ती करना पड़ा।

​रंगों का रिएक्शन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं

​हादसों के अलावा, कई लोग रंगों के दुष्प्रभाव के कारण भी अस्पतालों की शरण में पहुँचे। केजीएमयू और लोहिया संस्थान में कई मरीज आंखों में जलन, त्वचा पर खुजली और 'सस्पेक्टेड पॉइजनिंग' की शिकायतों के साथ आए थे।

रानी लक्ष्मीबाई और महानगर भाऊराव देवरस जैसे अस्पतालों में भी 75 से अधिक मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया किया गया।

​निजी अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में मरीज

​सरकारी आंकड़ों के अलावा, शहर के विभिन्न निजी अस्पतालों में भी लगभग 100 से अधिक घायल यात्रियों और हुड़दंगियों ने अपना इलाज कराया। पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी के बावजूद, नशे में तेज रफ्तार बाइक चलाने वालों की वजह से कई जगहों पर हिंसक झड़पें और टकराव की खबरें भी सामने आईं।

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