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 विक्रमोत्सव व्यापार मेले में इस साल वाहन बिक्री का नया रिकॉर्ड बना दिया। 43 दिनों में 41,538 गाड़ियां बिकीं। मेले में रोजाना औसतन 966 वाहनों की बिक्री हुई। जानिए कैसे टैक्स छूट ने खरीदारों को आकर्षित किया और कुल कारोबार 6000 करोड़ पार जा पहुंचा।

उज्जैन। महाकाल की नगरी में आयोजित विक्रमोत्सव व्यापार मेले ने इस साल वाहन बिक्री के मामले में नया इतिहास बना डाला है। 15 फरवरी से 29 मार्च तक चले मेले में रोजाना लगभग 966 वाहनों की बिक्री हुई। 43 दिन चले इस मेले में कुल 41,538 वाहन बिके। यह पिछले तीन सालों का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस बार मेले में लोगों का जबर्दस्त उत्साह देखने को मिला और हर दिन औसतन 966 वाहनों की बिक्री हुई, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

मेले में 32,548 चार पहिया वाहन बिके
आरटीओ के मुताबिक, इस बार चार पहिया वाहनों की बिक्री सबसे ज्यादा रही और इसने पुराने सभी रिकॉर्ड टूटते दिखाई दिए। मेले की कुल बिक्री में 32,548 चार पहिया वाहन शामिल रहे, जबकि 6,958 दोपहिया और 2,032 कमर्शियल वाहनों की भी अच्छी-खासी मांग देखने को मिली। आंकड़े बताते हैं कि मेले में हर वर्ग के लोगों ने अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से वाहन खरीदे। ज्यादा बिक्री के पीछे सबसे बड़ा कारण मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दी गई 50 प्रतिशत लाइफटाइम रोड टैक्स में छूट को माना जा रहा है। 

 पड़ोसी जिलों के लोगों ने भी की खरीदारी 
इस ऑफर का फायदा उठाने के लिए न सिर्फ उज्जैन, बल्कि इंदौर, भोपाल, देवास और रतलाम जैसे आसपास के शहरों से भी बड़ी संख्या में लोग मेले में पहुंचे। लोगों ने इस मौके को एक बेहतरीन डील के तौर पर देखा और बड़ी संख्या में वाहन खरीदे। अगर पिछले सालों से तुलना करें तो यह वृद्धि और भी स्पष्ट हो जाती है। साल 2024 में मेले में 23,705 वाहन बिके थे, जबकि 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 36,225 हो गया। वहीं 2026 में 41,538 वाहनों की बिक्री के साथ नया रिकॉर्ड बन गया है। इससे साफ है कि हर साल मेले की लोकप्रियता बढ़ रही है।  

6 हजार करोड़ से अधिक रहा कुल टर्नओवर  
मेले का असर सिर्फ वाहन बिक्री तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे जुड़े अन्य सेक्टरों को भी बड़ा फायदा हुआ है। होटल, रेस्टोरेंट, ट्रांसपोर्ट, बैंकिंग और इंश्योरेंस जैसे क्षेत्रों में भी काफी गतिविधि देखने को मिली। कारोबार के लिहाज से मेले का कुल टर्नओवर 6,000 करोड़ रुपए से अधिक आंका गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मेले से करीब 225 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है, वहीं उपभोक्ताओं को भी टैक्स में छूट के रूप में लगभग इतनी ही राशि का सीधा लाभ मिला। मेले के अंतिम दिनों में कई शोरूम्स पर गाड़ियों का स्टॉक तक खत्म हो गया और लोगों को डिलीवरी के लिए इंतजार करना पड़ा।

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