भोपाल। मध्य प्रदेश में नशीले पदार्थों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू करने की तैयारी है। इसी को लेकर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाना ने प्रदेश के सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से चर्चा की और जरूरी निर्देश दिए। इस बैठक में साफ किया गया कि 1 अप्रैल से राज्य में ड्रग्स उन्मूलन अभियान शुरू होगा, जिसका उद्देश्य सिर्फ छोटे स्तर के अपराधियों को पकड़ना नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क को खत्म करना है। बैठक में प्रदेश के एसपी, डीआईजी, आईजी और एडीजी स्तर के अधिकारियों ने भी अपने सुझाव दिए।
6 अप्रैल तक पेश करें जिलेवार रोडमैप
डीजीपी ने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा कि हर जिले को अपनी स्थिति के अनुसार एक ठोस योजना तैयार करनी होगी। यह रोडमैप 6 अप्रैल तक प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा, जिसमें यह बताया जाएगा कि जिले में ड्रग्स की सप्लाई कैसे होती है, किन इलाकों में ज्यादा खतरा है और उसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। इस योजना के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक जिले में एडिशनल एसपी को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जबकि रेंज स्तर पर डीआईजी इसकी निगरानी करेंगे।
पूरे ड्रग्स नेटवर्क को उखाडने पर जोर
इसके साथ ही नारकोटिक्स विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया गया है, ताकि ड्रग्स तस्करी के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आपसी समन्वय बढ़ाएं और सूचनाओं का आदान-प्रदान तेजी से करें। बैठक में यह भी कहा गया कि अब केवल छोटे सप्लायरों पर कार्रवाई करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस अवैध कारोबार के पीछे जो बड़े सरगना हैं, उन्हें भी पकड़ना जरूरी है। इसके लिए आरोपियों की जियो टैगिंग और साइबर ट्रैकिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
तकनीक से रखेंगे अपराधियों पर नजर
आधुनिक तकनीक से अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा और उन्हें जल्द पकड़ने में मदद मिलेगी। खासतौर पर स्कूल और कॉलेजों के आसपास कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि युवा वर्ग को ड्रग्स के जाल में फंसाने की कोशिशें ज्यादा होती हैं। पुलिस को ऐसे इलाकों में सतर्क रहने और नियमित जांच अभियान चलाने को कहा गया है। एडीजी डी. श्रीनिवास ने सुझाव दिया कि ‘निदान पोर्टल’ का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए, जिसमें देशभर के अपराधियों का डेटा उपलब्ध है। इससे अन्य राज्यों के अपराधियों की जानकारी भी मिल सकेगी और कार्रवाई को और मजबूत बनाया जा सकेगा।









