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वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर नर तेंदुए के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। डीएफओ ने बताया कि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है।

हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव मोसनुता के समीप एक तेंदुए का शव मिलने से हड़कंप मच गया। अरावली की पहाड़ियों से सटे इस इलाके में वन्यजीव की मौत की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत सक्रिय हो गई और मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। विभाग ने शव को कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है। 

4 वर्ष का था मृत तेंदुआ
विभागीय जानकारी के अनुसार, मृत पाए गए तेंदुए की उम्र करीब 3 से 4 साल के बीच बताई जा रही है। जिला वन अधिकारी (DFO) विजेंद्र कुमार ने मामले की पुष्टि कर बताया कि जैसे ही उन्हें मोसनुता के पास वन्यजीव के पड़े होने की सूचना मिली, टीम ने बिना देरी किए मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। शुरुआती तौर पर यह मामला प्राकृतिक मृत्यु का लग रहा है, लेकिन विभाग शिकार या अन्य किसी बाहरी हस्तक्षेप की आशंका को ध्यान में रखते हुए हर पहलू की गहराई से पड़ताल कर रहा है। 

पोस्टमार्टम के लिए तीन पशु चिकित्सकों की टीम गठित
तेंदुए की मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए प्रशासन ने पूरी पारदर्शिता बरतने का निर्णय लिया है। उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार के दिशा-निर्देशों पर तीन विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों का एक विशेष पैनल गठित किया गया है। यह टीम तेंदुए के शव का पोस्टमार्टम करेगी, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर इस युवा वन्यजीव की जान किस वजह से गई। डीएफओ ने बताया कि तकनीकी साक्ष्यों और विशेषज्ञों की राय के आधार पर ही अगली कार्रवाई तय की जाएगी।

वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सतर्क
इस घटना को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। डीएफओ विजेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि विभाग का प्राथमिक लक्ष्य अरावली क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण तैयार करना है। उन्होंने बताया कि उपायुक्त के आदेशानुसार वन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। वन विभाग की टीमें पहले से ही नियमित गश्त कर रही हैं, लेकिन इस घटना के बाद गश्त के दायरे और तकनीक को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

ग्रामीणों से सहयोग और जागरूकता की अपील
पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने के लिए वन विभाग अब स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर जन-जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दे रहा है। विभाग का मानना है कि ग्रामीणों के सहयोग के बिना वन्यजीवों का संरक्षण संभव नहीं है। डीएफओ ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की भ्रामक खबरों या अफवाहों पर यकीन न करें। साथ ही, यदि क्षेत्र में किसी भी वन्यजीव की संदिग्ध गतिविधि या संकट दिखाई दे, तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

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