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रतलाम जिले के रावटी क्षेत्र में जमीन के विवाद ने एक व्यक्ति की जान ले ली। गांव उमरबट्टा में अपने घर के बाहर सो रहे रामचंद्र गरवाल पर उनके भाई, भतीजे और एक रिश्तेदार ने हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल रामचंद्र की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

रतलाम। जिले के रावटी क्षेत्र में जमीन के विवाद में 21 मई 2025 की रात गांव उमरबट्टा में एक व्यक्ति की हत्या उस समय कर दी गई थी, जब वह अपने घर के बाहर हो रहे थे। उनका अपने छोटे भाई के साथ जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी दौरान उनका छोटा भाई, भतीजा और एक रिश्तेदार वहां पहुंचे और उस पर हमला कर दिया। हमले में रामचंद्र गरवाल और उनकी पत्नी घायल हो गए। बाद में उपचार के दौरान रामचंद्र की मौत हो गई। कोर्ट ने इस मामले में तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।  

इलाज के दौरान हो गई रामचंद्र की मौत
घायल रामचंद्र और उनकी पत्नी को पहले रावटी अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें रतलाम मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। इलाज के दौरान रामचंद्र की स्थिति बिगड़ती गई और बाद में उनकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने पर रावटी थाने के हेड कॉन्स्टेबल आतिश धानक अस्पताल पहुंचे। उन्होंने रामचंद्र का बयान दर्ज किया और उसका वीडियो भी बनाया। बाद में यही वीडियो इस मामले में अहम सबूत साबित हुआ।

कोर्ट में मृत्युपूर्व बयान बना मुख्य सबूत
अदालत ने घायल रामचंद्र के उस वीडियो बयान को मृत्यु पूर्व बयान के रूप में स्वीकार किया। इस बयान में रामचंद्र ने हमलावरों के नाम और पूरी घटना का विवरण दिया था। न्यायालय ने इसे भरोसेमंद साक्ष्य मानते हुए फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार दोनों भाइयों के बीच उनकी मां के नाम की जमीन के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था, जो आखिरकार हिंसक घटना में बदल गया।

तीनों पर 15-15 हजार जुर्माना भी लगा 
इस मामले की सुनवाई सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव की अदालत में हुई। सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने तीनों आरोपियों-गोबा, राजू और तेलिया-को दोषी ठहराया। अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। फैसले के समय यह भी बताया गया कि आरोपी घटना के बाद से ही जेल में बंद थे। पुलिस जांच के दौरान कई अहम सबूत सामने आए। डॉक्टरों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रामचंद्र के शरीर पर 16 चोटों की पुष्टि हुई। 

लाठियों पर मिले खून से मेल खाया DNA
इसके अलावा एफएसएल जांच में आरोपियों से बरामद लाठियों और कपड़ों पर मिला खून मृतक के डीएनए से मेल खा गया। पुलिस ने अदालत में 11 गवाह, 68 दस्तावेज और 33 भौतिक साक्ष्य पेश किए। इन सभी के आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी करार दिया। पुलिस और अभियोजन की तेज कार्रवाई के कारण अदालत में मामला पेश होने के करीब छह महीने के भीतर ही फैसला सुना दिया गया।  

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