मध्य प्रदेश के Kuno National Park से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बार फिर अच्छी खबर आई है। यहां मादा चीता ज्वाला ने पांच शावकों को जन्म दिया है। इन नए शावकों के जन्म के साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 53 हो गई है।
इस खुशखबरी की जानकारी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। उन्होंने इसे प्रोजेक्ट चीता की एक बड़ी उपलब्धि बताया।
सीएम ने बताया वन्य संरक्षण के लिए गर्व का क्षण
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में लिखा कि कूनो से आई यह खबर पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि ज्वाला द्वारा पांच शावकों को जन्म देना भारत में चीतों की पुनर्स्थापना के प्रयासों की सफलता का मजबूत प्रमाण है। सीएम ने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें मादा चीता अपने नवजात शावकों के साथ दिखाई दे रही है।
सभी शावक स्वस्थ, विशेषज्ञों की निगरानी
वन विभाग के अनुसार, जन्मे सभी पांचों शावक स्वस्थ हैं। विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों और वन अधिकारियों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है ताकि उनकी देखभाल सही तरीके से हो सके। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती दिनों में शावकों और उनकी मां की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
नामीबिया से लाई गई थी ज्वाला
मादा चीता ज्वाला मूल रूप से अफ्रीकी देश Namibia से भारत लाई गई थी। सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था।
उस समय ज्वाला का नाम सियाया था, जिसे बाद में बदलकर ज्वाला रखा गया। कूनो के वातावरण में उसने खुद को अच्छी तरह ढाल लिया और अब वह यहां की सबसे सफल मादा चीताओं में गिनी जाती है।
तीसरी बार बनी मां
ज्वाला इससे पहले भी दो बार शावकों को जन्म दे चुकी है। मार्च 2023 में 4 शावक हुए थे, जिनमें से एक जीवित बचा। जनवरी 2024 में उसने 3 शावकों को जन्म दिया। अब तीसरी बार पांच शावकों के जन्म के साथ ज्वाला ने कूनो में चीतों की आबादी बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
प्राकृतिक रूप से हुई मेटिंग
वन अधिकारियों के अनुसार इस बार ज्वाला की मेटिंग कूनो के खुले जंगल में प्राकृतिक रूप से हुई थी। यह इस बात का संकेत है कि चीते अब यहां के वातावरण में पूरी तरह अनुकूल हो चुके हैं।
प्रोजेक्ट चीता को मिल रहा नया संबल
लगातार हो रही प्रजनन सफलताओं से Project Cheetah को बड़ी मजबूती मिल रही है। अधिकारियों का कहना है कि फील्ड स्टाफ और पशु चिकित्सकों की निगरानी के कारण चीतों का अनुकूलन और प्रजनन दोनों सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हर नए शावक का जन्म इस महत्वाकांक्षी परियोजना को नई ऊर्जा दे रहा है और भारत में चीतों की वापसी के प्रयासों को और मजबूत बना रहा है।










