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प्रदेश में सड़क निर्माण में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। व्हाइट टॉपिंग, माइक्रो सरफेसिंग और वेस्ट प्लास्टिक तकनीक से सड़कों की मजबूती और उम्र दोनों बढ़ाने की तैयारी है।

भोपाल। राज्य में सड़क निर्माण में इन दिनों आधुनिक तकनीक और नवाचारों पर जोर दिया जा रहा है। सड़कों को टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए निर्माण प्रक्रिया में संशोधित बिटुमिन, जियो-टेक्सटाइल लेयर और सीमेंट ट्रीटेड बेस जैसी उन्नत तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, ताकि मजबूत सड़कें बनें और इनकी बार-बार मरम्मत की जरूरत न पड़े।  नई तकनीक सड़कों की गुणवत्ता और उम्र दोनों बढ़ाने में मददगार साबित हुई है। यही वजह है नई तकनीक को तेजी से अपनाया जा रहा है।   

लोकप्रिय हो रही व्हाइट टॉपिंग तकनीक
इनमें से एक तकनीक व्हाइट टॉपिंग इन दिनों बहुत लोकप्रिय हो रही है। इसमें  पुराने डामर यानी बिटुमिन की सड़क के ऊपर सीमेंट कंक्रीट की एक नई परत बिछा दी जाती है। इससे सड़क पहले की तुलना में अधिक मजबूत हो जाती है और इसकी उम्र लगभग 15 से 20 साल तक बढ़ सकती है। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सड़क को बार-बार मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे रखरखाव का खर्च कम हो जाता है।

माइक्रो सरफेसिंग से सड़क बनती है मजबूत
दूसरी तकनीक माइक्रो सरफेसिंग है। इसमें सड़क की सतह पर पॉलिमर मिश्रित एक पतली परत डाली जाती है। यह परत सड़क को अधिक चिकना और मजबूत बनाती है। इसका फायदा यह होता है कि सड़क पर दरारें कम बनती हैं और फिसलन भी घट जाती है, जिससे सड़क पर चलना अधिक सुरक्षित हो जाता है। यह तकनीक सड़क की उम्र बढ़ाती है। साथ ही बार-बार मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती। 

ग्लास ग्रिड तकनीक से बढ़ती है गुणवत्ता
तीसरी तकनीक ग्लास ग्रिड तकनीक है। इसमें सड़क की परतों के बीच फाइबर ग्लास का जाल लगाया जाता है। यह जाल सड़क की संरचना को मजबूत बनाता है और रिप्लेक्टिव क्रैकिंग यानी नीचे की परतों की दरारें ऊपर आने की समस्या को काफी हद तक कम कर देता है। इससे सड़क की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है। इसके अलावा वेस्ट प्लास्टिक मिश्रित सड़क भी एक नई और पर्यावरण अनुकूल तकनीक है। 

बेकार प्लास्टिक से भी बनने लगी हैं सड़कें
वेस्ट प्लास्टिक मिश्रित सड़क में बेकार प्लास्टिक को बिटुमिन के साथ मिलाकर सड़क बनाई जाती है। इससे प्लास्टिक कचरे का उपयोग भी हो जाता है और सड़क की मजबूती तथा जलरोधक क्षमता भी बढ़ जाती है। सरकार सड़क निर्माण की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए अब आधुनिक तकनीक और सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है।  निर्माण कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कई स्तरों पर निगरानी की व्यवस्था की जा रही है। 

ठेकेदारों की जवाबदेही भी तय की जा रही 
निगरानी व्यवस्था में नियमित निरीक्षण, लैब में सामग्री की जांच और थर्ड पार्टी ऑडिट जैसी प्रक्रियाएं शामिल होंगी। इसके साथ ही जीपीएस तकनीक के माध्यम से निर्माण कार्य पर नजर रखी जाएगी और ऑनलाइन प्रगति रिपोर्ट के जरिए अधिकारियों को हर समय काम की स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। इससे निर्माण स्थल की रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। इसके साथ ही नई व्यवस्था के तहत ठेकेदारों की जवाबदेही भी तय की जा रही है। 

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