भोपाल। प्रदेश पुलिस विभाग में कार्यवाहक पदोन्नति की प्रक्रिया पिछले करीब एक साल से ठप पड़ी है। इस वजह से हजारों पुलिसकर्मियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। पुलिस विभाग में सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक के अधिकारी लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन खाली पद होने के बावजूद उन्हें पदोन्नति नहीं मिल सकी है। हाल ही में 2015 बैच के सूबेदार और सब-इंस्पेक्टरों के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से मुलाकात कर इस मुद्दे को उठाया।
10-11 साल होने पर भी पदोन्नति नहीं
उन्होंने जल्द से जल्द पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने की मांग की और बताया कि कई अधिकारी अपनी पात्रता पूरी करने के बावजूद पदोन्नति से वंचित हैं।
जानकारी के अनुसार, कई ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने 10 से 11 साल की सेवा पूरी कर ली है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अगला पद नहीं मिल पाया है। नियमों के अनुसार वे प्रमोशन के हकदार हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे सीधे तौर पर उनका करियर प्रभावित हो रहा है।
अन्य विभागों में जारी है यह प्रक्रिया
पुलिस मुख्यालय का कहना है कि यह मामला फिलहाल शासन की मंजूरी और हाईकोर्ट के निर्णय पर निर्भर है। 2005 से 2025 तक के पदोन्नति नियमों को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है, जिसके कारण विभाग किसी भी तरह का निर्णय लेने से बच रहा है। जब तक इस पर स्पष्ट आदेश नहीं मिल जाता, तब तक प्रक्रिया शुरू होने की संभावना कम है।
शासन और अदालत पर टिकी निगाहें
दिलचस्प बात यह है कि राज्य के अन्य विभागों जैसे राजस्व, आबकारी और प्रशासनिक सेवाओं में कार्यवाहक पदोन्नति नियमित रूप से जारी है। जबकि, शासन की मंजूरी और हाईकोर्ट के निर्णय की वजह से पुलिस विभाग में पदोन्नति की यह प्रक्रिया पूरी तरह अटकी हुई है। इसकी वजह से पुलिसकर्मियों में भारी निराशा है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिक गई हैं कि शासन और अदालत से कब तक स्थिति स्पष्ट होती है और पदोन्नति का सिलसिला कब शुरू होता है।










