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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आदेश की अनदेखी करने पर 4 वरिष्ठ अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराया है। मंदसौर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में कोर्ट ने 2-2 महीने की सजा सुनाई, हालांकि इसे फिलहाल 3 हफ्तों के लिए स्थगित किया गया है।

इंदौर। राजधानी भोपाल से जुड़े एक अहम मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए चार वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है। कोर्ट ने इन अधिकारियों को दो-दो महीने की सजा सुनाई है, हालांकि राहत देते हुए फिलहाल इस सजा को तीन सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया गया है, ताकि वे आगे की कानूनी प्रक्रिया अपना सकें। इस मामले में पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान के साथ आईएएस अधिकारी तरुण राठी, डॉ. डीके तिवारी और डॉ. गोविंद चौहान को जिम्मेदार माना गया है। 

आदेशों का तय समय सीमा में पालन नहीं किया
अदालत ने पाया कि इन अधिकारियों ने पहले दिए गए न्यायिक आदेशों का तय समय सीमा में पालन नहीं किया, जो कि सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना के दायरे में आता है। दरअसल, यह पूरा मामला मंदसौर जिले के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मचारियों के नियमितीकरण से संबंधित है। कोर्ट ने 6 दिसंबर 2023 को एक आदेश जारी करते हुए 2004 से 2016 के बीच कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने के निर्देश दिए थे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि इस आदेश का पालन तीन महीने के भीतर किया जाए।

अफसरों के लिए साफ संदेश है यह फैसला
लेकिन निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बावजूद आदेश पर अमल नहीं हुआ। इसके बाद प्रभावित कर्मचारियों ने न्याय की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया और कुल नौ अवमानना याचिकाएं दायर कीं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि प्रशासन की ओर से आदेश को गंभीरता से नहीं लिया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने कड़ा फैसला सुनाते हुए चारों अधिकारियों को दोषी करार दिया और उन्हें सजा सुनाई। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन कर लिया जाता है, तो सजा से राहत संभव हो सकती है। 

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