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इंदौर में वर्ष शराब दुकानों के आवंटन के लिए चल रही ई-टेंडर और ई-ऑक्शन प्रक्रिया में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। पहले चरण के तीन बैचों में ही ठेकेदारों ने 1612 करोड़ रुपये से अधिक की बोली लगाई है।

इंदौर। जिले में वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए मदिरा की दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया ई-टेंडर और ई-टेंडर-कम-ऑक्शन के माध्यम से जारी है। इस प्रक्रिया में ठेकेदारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है, जिसके कारण आबकारी विभाग को अनुमान से अधिक राजस्व मिलने की संभावना है।

आरक्षित मूल्य से काफी अधिक बोली

शुरुआती चरण में ही कई समूहों के लिए आरक्षित मूल्य से काफी अधिक बोली प्राप्त हुई है। पहले चरण के तीन बैचों में अब तक कुल मिलाकर 1612 करोड़ रुपये से अधिक के ऑफर सामने आ चुके हैं। 2 मार्च को पहले बैच की नीलामी प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसमें कुल 19 समूह शामिल थे, जिनमें से 11 समूहों पर ही निविदाएं प्राप्त हुईं।

पहले बैच में आरक्षित मूल्य से अधिक बोलियां

पहले बैच का आरक्षित मूल्य लगभग 452.74 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया था, लेकिन नीलामी में सबसे अधिक बोली 498.37 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। यह आरक्षित मूल्य से लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। यदि पिछले वर्ष के वार्षिक मूल्य 377.28 करोड़ से तुलना करें तो लगभग 121 करोड़ रुपए की वृद्धि दर्ज हुई है।

 दूसरे बैच में भी दिखी थी तेज प्रतिस्पर्धा
5 मार्च को दूसरे बैच के तहत 12 समूहों की ई-टेंडर और नीलामी प्रक्रिया आयोजित की गई। इन समूहों का वार्षिक आधार मूल्य 325.86 करोड़ था, जबकि आरक्षित मूल्य 391.03 करोड़ तय किया गया था। उच्चतम बोली 448.20 करोड़ रुपए तक पहुंची, जो आरक्षित मूल्य से 14.62 प्रतिशत अधिक है।

तीसरे बैच के लिए भी लगीं ऊंची बोलियां
7 मार्च को तीसरे बैच के अंतर्गत 18 समूहों में से 11 समूहों के लिए ई-टेंडर और नीलामी प्रक्रिया शुरू हुई। इन समूहों के लिए कुल 43 निविदाएं प्राप्त हुईं। इनका आरक्षित मूल्य 608.12 करोड़ रखा गया था, जबकि उच्चतम बोली 666.18 करोड़ तक पहुंची। यह आरक्षित मूल्य से लगभग 9.55 प्रतिशत अधिक है।

कुल बोली 1612 करोड़ रुपए से अधिक

तीसरे बैच में पिछले वर्ष के 506.76 करोड़ के मुकाबले यह राशि लगभग 159 करोड़ ज्यादा है, यानी करीब 31 प्रतिशत की वृद्धि। 8 मार्च तक पहले चरण के कुल 56 समूहों में से 34 समूहों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। इन समूहों का पिछले वर्ष का कुल वार्षिक मूल्य 1209.92 करोड़ था।

पिछले साल से 33% अधिक लगी बोलियां

2026-27 के लिए इनका आरक्षित मूल्य 1451.90 करोड़ रखा गया, पर अब तक बोली 1612.77 करोड़ तक पहुंच चुकी है। यह पिछले वर्ष से 33 प्रतिशत और आरक्षित मूल्य से 11 प्रतिशत अधिक है। ई-टेंडर/नीलामी प्रक्रिया 10 मार्च को पूरी होने की संभावना है, जिसके बाद ही राजस्व का अंतिम आंकड़ा सामने आएगा।

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