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इंदौर हाईकोर्ट ने शाजापुर के आबकारी अधिकारी विजय रंगशाही को बड़ी राहत देते हुए उनके निलंबन और पद से हटाने के आदेश पर रोक लगा दी है। जानिए पूरा मामला और अदालत के फैसले की अहम बातें।

इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शाजापुर के जिला आबकारी अधिकारी विजय रंगशाही को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। अदालत ने कलेक्टर और संभागायुक्त द्वारा जारी किए गए उन आदेशों पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिनके चलते उन्हें पद से हटाया गया था और बाद में निलंबित भी किया गया था। इस निर्णय के बाद रंगशाही को पुनः अपने पद पर कार्य करने की अनुमति मिल गई है, जिससे उनके पक्ष को बड़ी कानूनी मजबूती मिली है।

लापरवाही के आरोप में पद से हटाया गया
दरअसल, शाजापुर कलेक्टर ऋजु बाफना ने 20 जनवरी को एक आदेश जारी करते हुए विजय रंगशाही पर शासकीय कार्यों में लापरवाही का आरोप लगाया था। इसी आधार पर उन्हें उनके पद से हटाकर सहायक जिला आबकारी अधिकारी निमिषा परमार को उस पद का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया था। इसके कुछ समय बाद उज्जैन संभाग के आयुक्त आशीष सिंह ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए रंगशाही को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।  

विजय रंगशाही ने हाईकोर्ट का रुख किया
इन सभी आदेशों को चुनौती देते हुए विजय रंगशाही ने हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने अदालत में यह दलील दी कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई नियमों के अनुरूप नहीं है और संबंधित अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र का सही तरीके से पालन नहीं किया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पूरे घटनाक्रम का परीक्षण किया और पाया कि कलेक्टर ने आयुक्त के निर्णय से पहले ही ऐसा कदम उठाया, जो उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर माना जा सकता है।

रद्द किए कलेक्टर-कमिश्नर के आदेश  
हाईकोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए इस आधार पर कलेक्टर और संभागायुक्त के आदेशों को फिलहाल स्थगित कर दिया है। इसके साथ ही, यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय होने तक संबंधित अधिकारी को उनके पद पर कार्य करने से नहीं रोका जा सकता। अदालत के इस आदेश के बाद विजय रंगशाही को दोबारा जिला आबकारी अधिकारी के रूप में अपनी जिम्मेदारियां संभालने का रास्ता साफ हो गया है। 

फैसला अधिकारों की सीमा को लेकर अहम

यह फैसला प्रशासनिक कार्यप्रणाली और अधिकारों की सीमाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करते समय निर्धारित प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र का पालन करना अनिवार्य है। कुल मिलाकर, यह निर्णय न केवल संबंधित अधिकारी के लिए राहत भरा है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और न्यायिक संतुलन को भी मजबूत करता है।

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