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इस बार किसानों को पिछले साल के 2425 के मुकाबले 160 रुपये प्रति क्विंटल अधिक मिलेंगे, जिससे नया न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपये तय हो गया है।

हरियाणा में रबी सीजन की फसलों की सरकारी खरीद को लेकर प्रदेश सरकार ने कमर कस ली है। इस बार किसानों के लिए अच्छी खबर यह है कि गेहूं की कीमतों में इजाफा किया गया है, साथ ही खरीद प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।

अब 2585 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा भाव 
प्रदेश के किसानों के लिए रबी विपणन सीजन 2026 खुशहाली लेकर आ रहा है। सरकार ने इस वर्ष गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 160 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी की है। पिछले वर्ष जहां गेहूं की सरकारी खरीद 2425 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर हुई थी, वहीं इस बार किसानों को अपनी फसल के लिए 2585 रुपये प्रति क्विंटल का दाम मिलेगा। हरियाणा में गेहूं की आधिकारिक खरीद प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। 
तैयारियों का जायजा लेने के लिए खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें भंडारण क्षमता और खरीद के लक्ष्यों पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। 

560 केंद्रों पर होगी फसलों की आवक 
राज्य सरकार ने फसलों की सुचारु खरीद सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश भर में कुल 560 मंडियों और खरीद केंद्रों की स्थापना का प्रस्ताव तैयार किया है। हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। खरीद से जुड़े अधिकारियों और मंडी सचिवों को नई प्रक्रियाओं और तकनीकी बदलावों के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि किसानों को मंडी में अपनी फसल बेचते समय किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। 

जारी होंगे डिजिटल गेटपास 
इस बार मंडी में प्रवेश और गेटपास की प्रणाली में बड़ा तकनीकी बदलाव किया जा रहा है। सरकार अब 'जियो-फेंसिंग' के जरिए गेटपास जारी करने की योजना पर काम कर रही है। इससे पहले खरीफ सीजन में किसानों को घर बैठे गेटपास बनाने की सुविधा मिली थी, लेकिन अब व्यवस्था को और अधिक पुख्ता बनाने के लिए जियो-फेंसिंग का विकल्प चुना गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि फसल वास्तविक स्थान से ही मंडी तक पहुंच रही है। 

सरसों खरीद के लिए भी बारकोड और सख्त नियम 
गेहूं के साथ-साथ सरसों की खरीद को लेकर भी नियम कड़े कर दिए गए हैं। संभावना है कि 28 मार्च से सरसों की सरकारी खरीद शुरू हो जाएगी। इस बार केवल उन्हीं किसानों को टोकन नंबर मिलेगा, जो एमएसपी पोर्टल पर पंजीकृत हैं। मंडी के गेट पर ही क्यूआर कोड जनरेट किया जाएगा और किसान के अंगूठे के निशान (Biometric) के माध्यम से बारकोड स्कैन होगा। 

पारदर्शिता के लिए नए बदलाव 
• किसान जिस वाहन (ट्रैक्टर-ट्रॉली या ट्रक) में फसल लेकर आएगा, उसका नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा।
• बिना वाहन नंबर के गेटपास जारी नहीं किया जाएगा। 
• पूरी प्रक्रिया को डिजिटल ट्रैक किया जाएगा ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके। 
इन कड़े नियमों का मुख्य उद्देश्य खरीद प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता लाना और यह सुनिश्चित करना है कि एमएसपी का सीधा लाभ केवल वास्तविक किसानों तक ही पहुंचे। 

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