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यमुनानगर में गैस एजेंसी के बाहर खड़ी प्रभजोत कौर का दर्द छलक पड़ा एक हफ्ते से सेलेंडर ना होने की वजह से रो पड़ी कहा गैस ना होने की वजह से गुरुद्वारे में जाकर खाना पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय तनाव (अमेरिका-इजराइल-ईरान) का सीधा असर अब हरियाणा की रसोई तक पहुँच गया है। प्रदेश भर में एलपीजी गैस की भारी किल्लत शुरू हो गई है, जिससे आम जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। गुरुवार को गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें देखी गईं, वहीं कई जगहों पर कालाबाजारी और सर्वर डाउन होने की शिकायतों ने लोगों की परेशानी दोगुनी कर दी है।

कहीं चूल्हे ठंडे, तो कहीं आँखों में आंसू
यमुनानगर में गैस एजेंसी के बाहर खड़ी प्रभजोत कौर का दर्द छलक पड़ा। सिलेंडर न मिलने से वह एजेंसी के बाहर ही रोने लगीं। उन्होंने बताया कि उनके घर में दो छोटे बच्चे हैं और एक सप्ताह से घर का सिलेंडर खाली पड़ा है। मजबूरन उन्हें और उनके परिवार को गुरुद्वारे में जाकर खाना खाना पड़ रहा है। ऐसी ही स्थिति हिसार में भी देखने को मिली, जहाँ एजेंसी संचालक जनता के बढ़ते आक्रोश को देख एजेंसी पर ताला लगाकर ही फरार हो गया। वहीं रेवाड़ी, कैथल और सोनीपत में लोग घंटों लाइन में लगने के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।

ढाबों से लेकर मंदिरों तक असर
गैस संकट का असर अब बड़े संस्थानों पर भी साफ दिख रहा है:

  • मुरथल के ढाबे: गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया (GAIL) ने मुरथल के ढाबों की पाइप लाइन आपूर्ति में 20 फीसदी की कटौती कर दी है। यहाँ के 100 से अधिक ढाबों पर गैस की किल्लत का सीधा असर पड़ा है।
  • मनसा देवी मंदिर: पंचकूला के मनसा देवी मंदिर में अब लाखों भक्तों को प्रसाद में रोटी मिलना बंद हो जाएगा। गैस की कमी के कारण ट्रस्ट ने कल से केवल कढ़ी-चावल और दाल-चावल का प्रसाद देने का निर्णय लिया है।

ब्लैक में बिक रहे सिलेंडर, हेल्प लाइन नंबर 'फेल'
हालात इतने नाजुक हो गए हैं कि गुरुग्राम जैसे शहरों में घरेलू सिलेंडर 1500 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3 से 4 हजार रुपये तक की ब्लैक मार्केट रेट पर बिक रहे हैं। सरकार द्वारा जारी टोल फ्री नंबर (18001802087) को लेकर भी लोगों में भारी गुस्सा है, उनका कहना है कि यह नंबर या तो मिल नहीं रहा या कोई सुनवाई नहीं हो रही।

ऑनलाइन बुकिंग और सर्वर की मार
प्रदेश भर में गैस एजेंसियों पर सर्वर डाउन रहने की समस्या लगातार बनी हुई है। ऑनलाइन बुकिंग न होने और एजेंसियों द्वारा पर्चियां काटना बंद करने से उपभोक्ता हताश हैं। कहीं-कहीं लोग अब लकड़ी जलाकर या हीटर का जुगाड़ कर गुजारा करने को मजबूर हैं।फिलहाल, अगर स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में यह संकट और अधिक गंभीर रूप ले सकता है।

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