चंडीगढ़ नगर निगम में स्मार्ट सिटी फंड से जुड़ी एक चौंकाने वाली वित्तीय धांधली का खुलासा हुआ है। निगम के 116.84 करोड़ रुपए के सरकारी फंड को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किए जाने के मामले में चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मास्टरमाइंड विक्रम वाधवा को गिरफ्तार कर लिया है। वाधवा का नाम पहले से ही हरियाणा में 590 करोड़ के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में चल रहा था।
क्या है पूरा घोटाला?
जांच में सामने आया है कि यह पूरा खेल मार्च 2025 के आसपास शुरू हुआ और करीब 10 महीनों तक चला। आरोपी ने निगम के सरकारी पैसों को सीधे अपनी तिजोरी भरने के बजाय 'ओपन मार्केट' में निवेश किया।
- फर्जी एफडी का खेल: नियमों के मुताबिक, स्मार्ट सिटी फंड की एक ही एफडी बननी थी, लेकिन आरोपियों ने निगम के पैसों से 11 फर्जी एफडी बना दीं। रिकॉर्ड में सिर्फ एक को ही दिखाया गया।
- निजी लाभ: सरकारी खातों से करोड़ों रुपए प्राइवेट खातों में ट्रांसफर किए जाते थे, जिसे बाद में बिल्डर्स, होटलियर्स और ज्वैलर्स को 'मोटे ब्याज' पर दिया जाता था। इस ब्याज की कमाई को बिचौलियों और कुछ संदिग्ध अधिकारियों के बीच बांट लिया जाता था।
- वापसी की चाल: पकड़े जाने से बचने के लिए, ये लोग प्राइवेट खातों से वही राशि कुछ समय बाद वापस सरकारी खाते में डाल देते थे, ताकि हिसाब में कमी न दिखे।
निगम के अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी?
यह सबसे बड़ा सवाल है कि करोड़ों का लेन-देन सैकड़ों बार हुआ, लेकिन निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को भनक क्यों नहीं लगी? सूत्रों का कहना है कि यह बिना ऊपरी मिलीभगत के संभव नहीं था। नगर निगम के आउटसोर्स अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा और आईडीएफसी बैंक के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि भी इस पूरे मामले में नामजद हैं।
कैसे पकड़े गए आरोपी?
घोटाले की कलई तब खुली जब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में कार्यरत एक आउटसोर्स कर्मचारी 'अभिनव' अचानक गायब हो गया। बैंक में अनियमितता मिलने पर जांच शुरू हुई तो 116.84 करोड़ की 11 एफडी के फर्जी होने का पता चला। हालांकि, आईडीएफसी बैंक ने ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के लिए निगम को ब्याज समेत 121 करोड़ रुपए वापस कर दिए हैं।
प्रशासन सख्त, फोरेंसिक ऑडिट की सिफारिश
मेयर सौरभ जोशी ने पूरे मामले की 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' मांगी है और पूरे वित्तीय लेनदेन का स्वतंत्र एजेंसी से फॉरेंसिक ऑडिट कराने की सिफारिश की है। नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार ने कहा कि पुलिस जांच में उन सभी अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट हो जाएगी, जिनके पास पासवर्ड थे और जिनकी लापरवाही से यह फंड निजी हाथों तक पहुंचा।
कॉल डिटेल और WhatsApp जांच
चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लकी ने मांग की है कि आरोपियों की पिछले एक साल की कॉल डिटेल और व्हाट्सएप मैसेज खंगाले जाएं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि निगम के सुरक्षित पासवर्ड और गोपनीय जानकारी एक बाहरी आउटसोर्स कर्मचारी तक कैसे पहुँची। विक्रम वाधवा का सेक्टर-17 स्थित स्मार्ट सिटी कार्यालय में अक्सर आना-जाना था। पुलिस अब उससे यह उगलवाने की कोशिश कर रही है कि इस करोड़ों के खेल में और कौन-कौन से अधिकारी 'पार्टनर' थे।
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