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पानीपत में चल रही तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में इसका प्रस्ताव रखा गया है। संघ के रणनीतिकारों ने 25 एकड़ में फैले 'माधव सृष्टि साधना केंद्र' को उत्तर भारत के 'नर्व सेंटर' के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) संगठनात्मक कायाकल्प की तैयारी में है। हरियाणा के पानीपत (पट्टी कल्याणा) में आयोजित अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के दौरान एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पर चर्चा होगी। संघ अब नागपुर के समानांतर उत्तर भारत में अपना एक नया मुख्यालय (Parallel Headquarters) स्थापित करने की योजना बना रहा है। इस तीन दिवसीय महामंथन का समापन रविवार 15 मार्च को सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के संबोधन के साथ होगा, जिसमें संघ के भविष्य की दिशा और नए ढांचे पर अंतिम मुहर लगेगी। 

पट्टी कल्याणा बनेगा उत्तर भारत का 'नागपुर' 
संघ के रणनीतिकारों का मानना है कि 1925 से नागपुर स्थित मुख्यालय से पूरे देश की गतिविधियों को संचालित किया जा रहा है लेकिन उत्तर भारत की राजनीतिक और सामाजिक जटिलताओं को देखते हुए अब एक क्षेत्रीय शक्ति केंद्र की आवश्यकता है। पानीपत के पट्टी कल्याणा में स्थित 'माधव सृष्टि सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र' को इसके लिए चुना गया है। 
25 एकड़ में फैला यह केंद्र न केवल आधुनिक सुविधाओं से लैस है, बल्कि दिल्ली से इसकी निकटता और बेहतर कनेक्टिविटी इसे रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत बनाती है, 8 साल पहले डॉ. मोहन भागवत ने ही इसकी नींव रखी थी और अब इसे उत्तर भारत के राज्यों की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले 'नर्व सेंटर' के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। 

2027 की तैयारी और सत्ता से दूर राज्यों पर 'मेगा फोकस'
हालिया लोकसभा चुनावों के परिणामों और हिंदी पट्टी में भाजपा की सीटों में आई कमी ने संघ को सतर्क कर दिया है। संघ का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे मजबूत गढ़ में पकड़ ढीली नहीं होनी चाहिए, वहीं उन राज्यों में पैठ बनाना अनिवार्य है जहाँ भाजपा अब तक वैचारिक या राजनीतिक रूप से कमजोर रही है। 
प्रतिनिधि सभा के एजेंडे में चार राज्य सबसे ऊपर हैं- केरल, तमिलनाडु, पंजाब और पश्चिम बंगाल। संघ इन राज्यों के लिए 'माइक्रो-मैनेजमेंट' और नए सांगठनिक ढांचे पर काम कर रहा है। 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले संघ अपने 100 साल पुराने ढांचे में 'विकेंद्रीकरण' (Decentralization) का प्रस्ताव भी ला सकता है, ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया जमीनी स्तर तक तेज हो सके।

पंजाब के लिए विशेष रणनीति 
संघ के लिए पंजाब एक बड़ी चुनौती रहा है। यहां सिखों और हिंदुओं के बीच 'नख-मांस' (नाखून और मांस) जैसा गहरा रिश्ता बताने के लिए संघ अब 'राष्ट्रीय सिख संगत' को नए सिरे से सक्रिय कर रहा है। पंजाब के लिए संघ ने चार सूत्रीय योजना तैयार की है। 
1. डोर-टू-डोर संवाद: सिख समुदाय के बीच फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए कार्यकर्ता गांवों में घर-घर जाएंगे।
2. मातृशक्ति का 'ममता संगम': महिलाओं के माध्यम से सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना।
3. नशा मुक्ति अभियान: पंजाब की युवा पीढ़ी को बचाने के लिए संघ इसे एक बड़े सामाजिक आंदोलन के रूप में छेड़ेगा।
4. प्रवासी संपर्क: 'पंच प्रबुद्धन' कार्यक्रम के जरिए विदेशों (कनाडा, यूके आदि) में बसे पंजाबियों को उनकी जड़ों से जोड़ने का प्रयास। 

रविदास जयंती के जरिए SC समाज को साधने की कोशिश 
उत्तर प्रदेश और पंजाब की राजनीति में अनुसूचित जाति (SC) समाज की भूमिका निर्णायक होती है। यूपी में करीब 21% और पंजाब में लगभग 32% दलित आबादी है। गुरु रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर संघ अगले साल फरवरी तक बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करेगा। जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां और काशी (रविदास जन्मस्थली) के प्रति इस समाज की आस्था को देखते हुए संघ वैचारिक माध्यम से इस वर्ग तक अपनी पहुंच बनाना चाहता है। 

2027 चुनाव की वैचारिक अग्निपरीक्षा 
संघ के सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के आगामी विधानसभा चुनाव संघ के लिए वैचारिक परीक्षा हैं, जबकि 2027 के उत्तर प्रदेश और पंजाब चुनाव अगले लोकसभा चुनाव का 'सेमीफाइनल' होंगे। संघ इन चुनावों को केवल राजनीतिक नहीं बल्कि 'सांस्कृतिक राष्ट्रवाद' की जीत के तौर पर देख रहा है। 
15 मार्च को बैठक के समापन पर सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले इन सभी महत्वपूर्ण निर्णयों की औपचारिक घोषणा करेंगे। यह साफ है कि संघ अब अपनी पुरानी कार्यपद्धति में आधुनिकता का समावेश कर रहा है और दक्षिण से लेकर उत्तर तक अपनी उपस्थिति को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए तैयार है। 

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