Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी केस में आरोपी ओम कांत गुप्ता की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। इस मामले में कोर्ट का कहना है कि पूरे ठगी के नेटवर्क और उसके तौर-तरीकों को समझने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ करना जरूरी है। वहीं इस मामले में हाईकोर्ट का कहना है कि यह गंभीर साइबर धोखाधड़ी का है, जिसमें तकनीक का इस्तेमाल करके लोगों को झांसा दिया जाता था, और उनसे पैसे भी वसूल किए जाते थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि रिकॉर्ड से यह पता चलता है कि सितंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच आरोपी के बैंक खाते में करीब 1.5 करोड़ रुपये जमा हुए, और निकाले भी गए। इसके बावजूद आरोपी ने बैंक में किसी तरह की शिकायत दर्ज नहीं कराई है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे में यह दलील कमजोर पड़ती है कि उसे अपने ही खाते में हो रहे लेनदेन के बारे में पता नहीं था।
दिल्ली हाई कोर्ट का कहना है कि यह गंभीर साइबर धोखाधड़ी का मामला है, इस तरह के मामले में लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में जांच एजेंसियों को पूरे नेटवर्क का खुलासा करने का मौका मिलना जरूरी है। दिल्ली पुलिस ने अदालत से कहा कि आरोपी को पिछले साल जांच में शामिल होने के लिए नोटिस दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद वह पेश नहीं हुआ। जिसकी वजह से पुलिस ने उसकी अग्रिम जमानत का विरोध किया है।
पीड़िता ने शिकायत में क्या बताया ?
बता दें कि इस मामले में साउथ दिल्ली के ग्रेटर कैलाश की रहने वाली एक महिला ने शिकायत दर्ज करवाई थी। महिला ने पुलिस को बताया कि 15 मार्च 2025 को उसे व्हाट्सऐप कॉल आई, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को सर्विलांस अधिकारी बताया।
आरोपी ने महिला पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाते हुए कहा कि सुप्रीम सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उसे डिजिटल अरेस्ट किया गया है। इसके बाद आरोपी ने महिला को डराकर उससे करीब 1.3 करोड़ रुपये दो अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए।
जांच में सामने आया है कि जिन खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए, उनमें से एक खाता ओम कांत गुप्ता के नाम पर था, जिसमें 30 लाख रुपये आए और उसी दिन दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। पुलिस ने इस मामले में जबरन वसूली, धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं में केस दर्ज करके मामले की जांच शुरू कर दी है।









