संभल: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संभल जिले के प्रशासन को लेकर बेहद तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने संभल के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को फटकार लगाते हुए कहा कि यदि वे जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।
यह मामला संभल की जामा मस्जिद में नमाजियों की संख्या को सीमित करने के प्रशासनिक आदेश से जुड़ा है, जिसे अदालत ने संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ माना है।
मस्जिद में नमाजियों की संख्या तय करने पर कोर्ट का कड़ा रुख
हाईकोर्ट की जस्टिस कश्यप की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रशासन का काम शांति व्यवस्था कायम रखना है, न कि किसी की धार्मिक स्वतंत्रता को बाधित करना। कोर्ट ने सवाल उठाया कि प्रशासन यह कैसे तय कर सकता है कि मस्जिद के भीतर कितने लोग नमाज पढ़ेंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासन को कानून-व्यवस्था के नाम पर इस तरह के अनुचित प्रतिबंध लगाने का कोई अधिकार नहीं है। प्रशासन द्वारा नमाजियों की संख्या घटाकर 10 करने की कोशिशों पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जाहिर की।
प्रशासनिक विफलता पर सख्त चेतावनी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यदि DM और SP को लगता है कि लोगों के मस्जिद जाने से दंगे हो सकते हैं या वे स्थिति को नियंत्रित नहीं कर पाएंगे, तो यह उनकी प्रशासनिक विफलता है। कोर्ट ने टिप्पणी की, "अगर आप कानून नहीं संभाल सकते, तो कुर्सी छोड़ दें।" अदालत ने प्रशासन को निर्देशित किया कि वे शांति बनाए रखने के लिए अन्य सुरक्षात्मक उपाय करें, लेकिन धार्मिक गतिविधियों पर इस तरह का अंकुश न लगाएं जो तनाव को और बढ़ा सकता हो।
संभल में मस्जिद विवाद की पृष्ठभूमि और मौजूदा तनाव
बता दें कि संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा है, जिसके बाद प्रशासन ने एहतियातन कई कड़े कदम उठाए थे। पुलिस और प्रशासन का तर्क था कि भीड़ बढ़ने से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है, इसलिए नमाजियों की संख्या सीमित की गई थी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए अधिकारियों को अपनी कार्यशैली सुधारने की चेतावनी दी है। मामले की अगली सुनवाई तक कोर्ट ने प्रशासन को कानून के दायरे में रहकर काम करने के निर्देश दिए हैं।










