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आईएएस अभिषेक प्रकाश को रिश्वतखोरी के आरोप में एक साल तक निलंबित रहने के बाद बहाल कर दिया गया है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 2006 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश को सेवा में बहाल कर दिया है। करीब एक साल पहले, उन पर एक बड़े निवेश प्रोजेक्ट के बदले भारी रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। अब शिकायतकर्ता के अपने बयानों से मुकर जाने और कोर्ट द्वारा मामले को रद्द किए जाने के बाद सरकार ने उनकी बहाली का आदेश जारी किया है।

​एक करोड़ की रिश्वत का मामला और एसटीएफ की कार्रवाई

​यह पूरा विवाद पिछले साल तब शुरू हुआ था जब इन्वेस्टर विश्वजीत दत्ता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी कंपनी 'SEAL सोलर P6 प्राइवेट लिमिटेड' को सोलर सेल यूनिट लगाने की अनुमति देने के बदले में करीब 1 करोड़ रुपये का कमीशन मांगा गया था। इस शिकायत की गंभीरता को देखते हुए मामला एसटीएफ को सौंपा गया, जिसने त्वरित कार्रवाई करते हुए अभिषेक प्रकाश के करीबी माने जाने वाले बाबू निकान्त जैन को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान बाबू ने स्वीकार किया था कि वह आईएएस अधिकारी के कहने पर ही रिश्वत की मांग कर रहा था।

​हाईकोर्ट में शिकायतकर्ता का पलटना और कानूनी क्लीन चिट

​अभिषेक प्रकाश के लिए राहत की खबर तब आई जब यह मामला लखनऊ हाईकोर्ट पहुँचा। सुनवाई के दौरान मुख्य शिकायतकर्ता विश्वजीत दत्ता अपने पहले के आरोपों से पूरी तरह मुकर गए और उन्होंने अदालत को बताया कि यह शिकायत मात्र एक 'गलतफहमी' के चलते दर्ज कराई गई थी।

शिकायतकर्ता के इस यू-टर्न के बाद अदालत ने मामले को रद्द कर दिया। इसी कानूनी राहत को आधार बनाते हुए शासन ने अभिषेक प्रकाश का निलंबन समाप्त कर उन्हें पुनः मुख्यधारा की प्रशासनिक सेवा में शामिल कर लिया है।

​विवादों और घोटालों से रहा है पुराना नाता

​निलंबन हटने के बावजूद अभिषेक प्रकाश का करियर विवादों से मुक्त नहीं रहा है। उन पर पूर्व में कई गंभीर आरोप लग चुके हैं, जिनमें लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष रहते हुए चयनात्मक तरीके से बिल्डरों को फायदा पहुँचाने और अवैध निर्माणों पर आंखें मूंदने के मामले शामिल हैं।

इसके अलावा, लखनऊ के भटगांव में डिफेंस कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित की गई जमीनों के मुआवजे में करीब 20 करोड़ रुपये के हेरफेर और मनमाने ढंग से दरें तय करने में भी उनकी भूमिका को संदिग्ध माना गया था।

​बेनामी संपत्ति और स्टाम्प चोरी के गंभीर आरोप

​अभिषेक प्रकाश के खिलाफ डीएम के पद पर रहते हुए लखीमपुर खीरी, अलीगढ़ और हमीरपुर जैसे जिलों में भी कई शिकायतें मिली थीं। उन पर आरोप है कि उन्होंने लखीमपुर और बरेली में अपने माता, पिता और भाई के अलावा कई फर्जी कंपनियों के नाम पर करीब 1100 बीघा जमीन खरीदी।

इन सौदों में न केवल सरकारी पद का दुरुपयोग कर बेनामी संपत्ति अर्जित करने की बात सामने आई, बल्कि स्टाम्प ड्यूटी की चोरी करने के आरोप भी लगे थे। 

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