हरियाणा सतलोक आश्रम मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे रामपाल की जेल से रिहाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो चुका है। एक दशक से अधिक समय जेल में रहने के बाद आज रामपाल के हिसार जेल से बाहर आने की उम्मीद है। हिसार की स्थानीय अदालत में हत्या के दो भिन्न प्रकरणों में पांच-पांच लाख रुपये के बेल बॉन्ड जमा कर दिए गए हैं। अदालती औपचारिकताओं के संपन्न होने के बाद रिहाई से संबंधित आवश्यक दस्तावेज जेल प्रशासन के पास पहुंच चुके हैं, जिसके बाद प्रशासन ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।
देशद्रोह मामले में मिली बड़ी राहत
रामपाल की जेल से वापसी का रास्ता पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद साफ हुआ, जिसमें उसे देशद्रोह से जुड़े एक गंभीर मामले में नियमित जमानत दी गई थी। सभी कानूनी अड़चनों के दूर होने के बाद अब उसके बाहर आने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। चर्चाओं के अनुसार जेल से निकलने के बाद रामपाल का काफिला सीधे सोनीपत स्थित आश्रम की ओर रवाना हो सकता है। इसे देखते हुए पुलिस ने विभिन्न मार्गों पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं।
कोर्ट में चली लंबी कानूनी जिरह
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव और सरकारी पक्ष के वकीलों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। रामपाल के वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि वह दिसंबर 2014 से लगातार हिरासत में है और करीब 11 वर्ष का समय जेल में काट चुका है। बचाव पक्ष का मुख्य तर्क यह था कि इस मामले में गवाहों की संख्या बहुत अधिक है और अभी तक मात्र 58 गवाहों के बयान ही दर्ज हो पाए हैं, जिससे ट्रायल के जल्द पूरा होने की कोई संभावना नहीं दिखती। इसके अतिरिक्त, रामपाल की 75 वर्ष की आयु और गिरते स्वास्थ्य को भी मानवीय आधार पर जमानत का मुख्य कारण बनाया गया।
सरकारी पक्ष का तीखा विरोध
दूसरी ओर सरकारी वकील ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध कर अदालत को 2014 के उन हिंसक दृश्यों की याद दिलाई, जब रामपाल की गिरफ्तारी के दौरान उसके समर्थकों ने पुलिस बल पर पेट्रोल बमों और पत्थरों से हमला किया था। सरकारी पक्ष का कहना था कि ऐसे गंभीर आरोपी को राहत देने से कानून-व्यवस्था के समक्ष नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। हालांकि, अदालत ने लंबी कैद और न्यायिक प्रक्रिया में हो रहे विलंब को ध्यान में रखते हुए रामपाल के हक में फैसला सुनाया।
2014 में पुलिस और समर्थकों में हुआ था संघर्ष
यह पूरा मामला वर्ष 2014 का है, जब हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में पुलिस और समर्थकों के बीच भीषण संघर्ष हुआ था। उस समय रामपाल को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम को भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था और इस हिंसा में 6 लोगों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद रामपाल पर हत्या और राजद्रोह सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए थे और निचली अदालत ने उसे दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
जेल के बाहर सुरक्षा का कड़ा पहरा
रिहाई की सूचना मिलते ही हिसार की सेंट्रल जेल के बाहर सुरक्षा को सख्त कर दिया गया है। किसी भी संभावित भीड़ या कानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालने के लिए दंगा नियंत्रण वाहनों को मौके पर तैनात किया गया है। जेल परिसर में दिल्ली पंजीकरण नंबर की लग्जरी गाड़ियां पहुंच चुकी हैं, जो रामपाल को ले जाने के लिए तैयार हैं। प्रशासन इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पूरी तरह सतर्कता बरत रहा है ताकि समर्थकों की भीड़ के कारण यातायात या शांति व्यवस्था बाधित न हो।
सख्त शर्तों के साथ मिली है जमानत
अदालत ने रामपाल की जमानत मंजूर करते समय कुछ कड़ी शर्तें भी आरोपित की हैं। आदेश के अनुसार रामपाल भविष्य में किसी भी ऐसी गतिविधि का हिस्सा नहीं बनेगा जिससे समाज में अशांति फैलने या भीड़ जुटने की संभावना हो। यदि वह किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि में लिप्त पाया जाता है या जमानत की शर्तों का उल्लंघन करता है तो राज्य सरकार को उसकी जमानत तत्काल निरस्त कराने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है। फिलहाल, सभी की निगाहें जेल के मुख्य द्वार पर टिकी हैं जहां से 11 साल बाद रामपाल की वापसी होनी है।
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